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गन्ना संकट: मुश्किल में चीनी मिल

गन्ना संकट के चलते अपनी चीनी मिलों में ज्यादा दिनों तक गन्ना पेराई करने के लिए सभी चीनी मिलों ने एक दूसरे के रकबों की मांग करने की कवायद शुरु कर दी है। इसी के चलते गन्ना आयुक्त ने विभाग से पिछले वर्ष की रिपोर्ट मांग ली है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष की रिपोर्ट पर विश्लेषण किया जाएगा।

मंडल में लगातार पिछले तीन वर्षो से गन्ने का क्षेत्रफल घटने से विभाग भी खासी मुश्किल में है। इसके लिए किसानों को गन्ना क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए अनेक योजना चलाई जा रही है। इसके बाद भी इसवर्ष मंडल के क्षेत्रफल में 13 फीसदी की कमी आई है। यही कारण है कि चीनी मिलों को अभी से डर सताने लगा है कि इसबार गन्ने की पूर्ति नहीं हुई तो चिमनियों से धुआं निकलना समय से पहले ही बंद हो जाएगा।

गन्ना संकट की आशंका से ग्रस्त चीनी मिलों में एक दूसरे के रकबे को अपने रकबे में शामिल करने की कवायद तेज कर दी है। गन्ना सहकारी समितियों के सचिवों से चीनी मिलों ने रकबे की मांग शुरु कर दी है। वहीं मंडल की सभी 19 चीनी मिलों के गन्ने के रिकॉर्ड को देखकर गन्ना आयुक्त सुधीर कुमार ने इसकी गन्ना विभाग से 2008-09 की रिपोर्ट मांग ली है।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए गुरुवार शाम चार बजे तक का समय दिया गया है। इसी के चलते गन्ना विभाग ने सभी चीनी मिलों को इसकी रिपोर्ट फैक्स करने के आदेश जारी कर दिए है। मालूम हो कि इसबार मंडल की सभी चीनी मिले 70 से 100 दिनों के अंतराल में ही बंद हो गई थी।

 

 

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