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पोखरण पर पूर्व वैज्ञानिक के दावे को सरकार ने नकारा

पोखरण पर पूर्व वैज्ञानिक के दावे को सरकार ने नकारा

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक के इस दावे पर कि 1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण अपेक्षित उद्देश्य हासिल नहीं कर सका, सरकार ने गुरुवार को कुछ खास ध्यान नहीं दिया और वैज्ञानिक की बात को नकार सा दिया।

पोखरण-2 परमाणु परीक्षण में शामिल रहे वैज्ञानिक के संथानम के दावे पर टिप्पणी पूछने पर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि किसी ने कोई बयान दिया। मैं बयान से पसोपेश में हूं। यदि आप पसोपेश में नहीं हैं तो आप जीनियस हैं। वैज्ञानिक के दावे में कोई दम नहीं होने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार संथानम के बयान की प्रामाणिकता का पता लगाएगी।

संथानम ने कहा है कि मई 1998 में जिस थर्मोन्यूक्लियर या हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया गया, वह कम शक्ति का था और ऐसा बम नहीं था, जो देश के सामरिक उद्देश्यों की पूर्ति करता हो। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को और परमाणु परीक्षण करने की जरूरत है और उसे सीटीबीटी पर दस्तखत नहीं करना चाहिए।

वैज्ञानिक की बात का वाजपेयी सरकार के समय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्र ने प्रतिवाद किया है। मिश्र ने कहा कि परमाणु उर्जा विभाग के तत्कालीन प्रमुख आर चिदंबरम ने उन्हें 13 मई, 1998 को खबर दी थी कि किए गए पांचों परीक्षण मानदंड पर खरे उतरे हैं और छठा परीक्षण करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बात हमें एकदम स्पष्ट है कि थर्मोन्यूक्लियर और परमाणु परीक्षण सफल रहे हैं।
 
संथानम की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया में नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता ने कहा कि भारत की परमाणु प्रतिरोधी क्षमता साबित हो चुकी है। भारत के परमाणु हथियारों की क्षमता के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि जहां तक हमारा सवाल है, हम वैज्ञानिकों के नजरिये पर चलते हैं। उन्होंने हमें कुछ क्षमता दी जो प्रतिरोध मुहैया कराने में सक्षम है और यह साबित हो चुका है।

मेहता ने संकेत किया कि भारत पहले आक्रमण नहीं करने की नीति  को मानता है। नौसेना प्रमुख का कहना था कि हम एक ऐसे देश हैं जो विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता रखता है और किसी का भी प्रतिरोध करने के लिए यह काफी है।

संथानम ने दावा किया है कि दुनिया का कोई भी देश केवल एक परीक्षण से थर्मोन्यूक्लियर हथियार हासिल करने में सफल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मैं इस विकल्प में यकीन रखता हूं कि यदि मौका आए तो हमें एक और परीक्षण करना चाहिए। मेरा यही नजरिया है। मैं बरसों से इसे स्पष्ट करता आया हूं। उनके नजरिये का परमाणु वैज्ञानिक सुब्रहमण्यम ने समर्थन करते हुए कहा है कि भूकंप के संकेतों में कुछ गड़बड़ी दिखी है, जो मुझे कुछ कमजोर नजर आती है इसलिए मैं संथानम की बात से सहमत हूं।

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