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18 जनवरी, 2020|11:09|IST

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सरकार को हाईटेक सिटी योजना में सुस्ती गवारा नहीं

प्रदेश सरकार ने हाईटेक सिटी योजना में लापरवाही के मामलों में सख्ती बरतते हुए चेतावनी दी है कि ऐसे में विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाईटेक सिटी और इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजना की नियमित समीक्षा मुख्यमंत्री स्तर पर की जाएगी।

प्रमुख सचिव आवास हरमिन्दर राज सिंह की ओर से गुरुवार को जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार हाईटेक सिटी और इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निवेशकों को तरह-तरह की छूट दे रही हैं। इन योजनाओं में निवेशकों को पिछले दिनों विकास शुल्क में छूट दी गई। इसके अलावा बड़े निवेशकों को जमीन खरीदने के लिए स्टाम्प शुल्क में भी छूट दिए जाने के आदेश शासन ने दिए हैं।

निवेशकों को जमीन अधिग्रहण करने में सरकारी मदद भू-उपयोग परिवर्तन में भी छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया है। यह भी तय किया गया है कि जो भूमि बिल्डर खरीदेगा, उसका तत्कालीन भू-उपयोग के हिसाब से स्टाम्प शुल्क लिया जाएगा न कि प्रस्तावित योजना के आधार पर।

प्रमुख सचिव आवास ने जारी आदेश में कहा है कि इंटीग्रेटेड टाउनशिप और हाईटेक सिटी योजना के निवेशकों के प्रार्थन पत्रों का निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसमें उनके नक्शा पास करने का प्रकरण हो या किसी सरकारी छूट का  प्रस्ताव अथवा भू-उपयोग परिवर्तन का मामला। इन सबको नियत समय के अंदर तत्काल किया जाएगा।

इन योजनाओं की हर महीने मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा की जाएगी और अगर किसी भी प्राधिकरण में यह साबित हो गया कि फाइल बेवजह लटकाई गई है तो सम्बन्धित विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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