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गाजियाबाद में जमीन व प्रापर्टी विवाद बना कत्लों की वजह

जर, जोरू और जमीन का हमेशा से विवादों से नाता रहा है। सदियों से इन तीन चीजों की वजह से झगड़े, मुकदमे व कत्लेआम होते रहे हैं, लेकिन गाजियाबाद में हत्याओं की सबसे बड़ी वजह जमीन व प्रापर्टी विवाद बनकर सामने आए हैं।

एनसीआर में यदि सबसे ज्यादा भूमाफिया कहीं पर सक्रिय हैं तो शायद गाजियाबाद में। गांवों में अक्सर दो पक्षों के बीच जमीन के टूकड़े के विवाद में खूनी रंजिश हो चुकी है। पिछले दिनों मुरादनगर के एक गांव में दो पक्षों के बीच जमीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए दो हत्याएं हुई थी। दोनों पक्षों का एक-एक आदमी मारा गया था।

पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लोनी से लेकर गढ़ तक सक्रिय 75 भूमाफियाओं की फेहरिस्त है। जिनमें से काफी जेल में हैं और कई जमानत पर बाहर हैं। लोनी, साहिबाबाद और विजयनगर क्षेत्र में सबसे ज्यादा भूमि विवाद और मकान पर विवाद के मामले के मामले दर्ज हैं।
 
जमीन व प्रापर्टी के विवाद को लेकर कई बार खूनी खेल खेला जा चुका है। देहात क्षेत्रों में अक्सर दो पक्षों में हुए झगड़ों में लोग मारे जा चुके हैं। वर्ष 2008 से लेकर अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा लोग आपसी झगड़ों में मारे जा चुके हैं। कई परिवारों में पीडियों से दुश्मनी चली आ रही है। कभी एक पक्ष दूसरे पक्ष के किसी व्यक्ति को मार देता तो कभी दूसरा पक्ष। कोर्ट में जमीन व प्रापर्टी विवाद के तमाम मामले वर्षों से चल रहे हैं। नूरपुर गांव में चार महिलाओं की सामूहिक हत्याओं की वजह भी जमीन का विवाद ही थी।

 

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  • Web Title:गाजियाबाद में जमीन व प्रापर्टी विवाद बना कत्लों की वजह