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कूड़ा बीनने वाले मजदूरों को मिले लाइसेंस

कूड़ा बीनने वाले मजदूरों को लाइसेंस मिलना चाहिए। कूड़ा प्रबंधन का काम कर रहीं निजी कंपनियों द्वारा मजदूरों का उत्पीड़न भी बंद किया जाना चाहिए। इस तरह के प्रस्ताव ऑल इंडिया कबाड़ी मजदूर महासंघ के सम्मेलन में पारित किए गए। गुरुवार को कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हॉल में सम्मेलन का आयोजन किया गया। ‘निजीकरण का बढ़ता दबाव एवं मजदूरों के समक्ष आजीविका संकट: समस्या एवं समाधान’ विषय पर सम्मेलन में चर्चा की गई।

वक्ताओं ने कहा कि कूड़ा बीनने वाले मजदूरों का एक मात्र सहारा कूड़ा बीनना ही है। यदि यह काम उनसे छिन गया तो वे रोटी के लिए तरस जाएंगे। महासंघ के महासचिव शशि बी पंडित ने कहा कि अस्सी प्रतिशत कूड़े का निस्तारण करने में कूड़ा मजदूर सक्षम हैं। दिल्ली में साढ़े तीन लाख मजदूर इस काम में लगे हैं। डेढ़ लाख सीधे तौर पर कूड़ा बीनने का काम करते हैं। सरकार को इन मजदूरों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाना चाहिए।

इन मजदूरों का कूड़े पर हक है। सम्मेलन में कूड़ा मजदूर समूहों के प्रतिनिधि अच्छी संख्या में उपस्थित रहे। विभिन्न संगठन और संस्थाओं से अमरीश, जे. जॉन, रमेश प्रणोश, देवेन्द्र बराल, डा. भरत, रवि अग्रवाल, दूनू राय आदि ने मुख्य रूप से सम्मेलन में विचार व्यक्त किए।

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