DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्कूलों के गिरते स्तर में सुधार लाने का दावा

सरकारी स्कूलों की छवि सुधारने के लिए अब पैनल इंसपेक्शन का सहारा लिया जा रहा है। यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद् के निर्देश पर इसे प्रमुखता से अंजाम देने की तैयारी चल रही है।


पैनल इंस्पेक्शन के जरिए स्कूलों के पठन-पाठन में सुधार लाने के साथ-साथ छात्र -शिक्षकों के बीच की खाई को दूर किया जाएगा। सितम्बर के पहले सप्ताह से जिले के 15 स्कूलों में स्कूल इंसपेक्शन अभियान का श्रीगणोश किया जाएगा। इंसपेक्शन में क्वालिटी बेहतर करने के लिए शिक्षकों के बीच कोर्डिनेशन और छात्रों से उनके सीधे साक्षात की भी कवायद की गई है।


डीआईएसओ ज्योति प्रसाद के अनुसार माध्यमिक शिक्षा परिषद के दिशा-निर्देश के अनुसार  पैनल इंसपेक्शन के लिए प्रत्येक साल 25 फीसदी स्कूल के चयन का प्रावद्यान है। पैनल इंसपेक्शन के लिए हाई स्कूल अथवा सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिसिंपल को नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। नोडल अफसर के देखरेख में गठित चार सदस्यीय टीम में तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट और फाइनेंशियल व टेक्नीकल डील के लिए एक क्लर्क शामिल किए गए हैं। जिले के 45 एडेड स्कूलों में से चुने गए15 स्कूलों में पैनल इंसपेक्शन के लिए नोडल अफसर नियुक्त कर लिए गए हैं। 


 इधर पैनल इंसपेक्शन की भनक लगते ही शिक्षक लामबंद होने लगे हैं। उनके अनुसार पैनल इंसपेक्शन का मतलब है अध्यापन के मामले में शिक्षकों पर संदेह करना। डीआईएसओ ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनके अनुसार क्वालिटी इम्पूवमेंट के लिए विल पावर की जरुरत है। और यह तभी संभव है जब नव नियुक्त शिक्षक अपने दायित्वों को पूरी प्रमुखता निभाए। यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ की जिला सचिव ऊषा विकल ने यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद् के इस अभियान का स्वागत किया है। उनके अनुसार पैनल इंसपेक्शन से स्कूलों के गिरते स्तर में सुधार होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:स्कूलों के गिरते स्तर में सुधार लाने का दावा