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फिजूलखर्ची पर रोक लगाये सरकार : राजद

अनुदान पाने के लिए सर्वदलीय समिति और राहत वितरण के लिए नौकरशाह । राजद ऐसा नहीं होने देगा। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार सुखाड़ और बाढ़ के मामले को लेकर सिर्फ राजनीति कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि स्थिति 1967 से भी बदतर है बावजूद फिजूलखर्ची पर रोक नहीं लगाते हैं। आपदा के समय में स्वयंसेवी संस्थाएं याद आती हैं और पुरस्कृत किये जाते हैं नौकरशाह । कोसी त्रसदी से निपटने के लिए विधायकों और सांसदों से राशि ले ली गई लेकिन उसका हिसाब उन्हें नहीं दिया गया।  

प्रदेश अध्यक्ष अब्दुलबारी सिद्दीकी ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि सरकार सर्वदलीय बैठक में किये वादों को भूल गई है। राजद जनता की पीड़ा को समझता है और हर मोड़ पर सरकार को मदद कर रहा है। पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी सूखे की समस्या पर प्रधानमंत्री से बात की है। लेकिन राज्य सरकार राहत वितरण के लिए अब तक जिलों में न तो कोई सर्वदलीय समिति बना सकी और न ही जमाखोरों पर कार्रवाई शुरू हुई। इससे साफ हो गया कि सूखा पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक भी राजनीति का हिस्सा ही थी। उन्होंने मांग की कि इस विषम परिस्थिति में सरकार मितव्ययिता बरते।

अफसरों और मंत्रियों के पेट्रोल खर्चे को सीमित करे साथ ही उनके आवासों की साज-सज्जा पर किये जाने वाले करोड़ों के खर्च पर रोक लगे और शाही आयेजन बंद हों। उन्होंने कहा कि कोसी त्रसदी से निपटने के लिए मुख्यमंत्री के आह्वान पर विधायकों ने 25-25 लाख, सांसदों ने 10-10 लाख और विधान पार्षदों ने30-30 लाख रुपये दिये लेकिन किसी को इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके पैसे का क्या हुआ। जिस योजना में राशि खर्च हुई उस पर उनका नाम अंकित होना चाहिए था।

अपनी डय़ूटी करने वाले अफसर पुरस्कृत कर दिये गये लेकिन जान जोखिम में डाल काम करने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित नहीं किया गया। संवाददाता सम्मेलन में विधान पार्षद राम वचन राय भी उपस्थित थे।

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