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जब मास्क हों महंगे तो बचाव कैसे?

आज हर समाचार पत्र, दूरदर्शन व अन्य चैनलों में दिन भर स्वाइन फ्लू का खौफ दिखाया जा रहा है। आरोप प्रत्यारोपों का सिलसिला चालू है। प्राइवेट अस्पताल इसके मरीजों से परहेज कर रहे हैं। अस्पतालों में सब मास्क लगाए दिख रहे हैं। कतिपय नवधनाढ्य और फैशनेबल लोग भी।  एच1एन1 के ‘ट्रिपल लेयर’ मास्क की कीमत कम से कम 150 रु. है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ये केवल बारह घंटे या गीला हो जाने पर तुरंत बदला पड़ता है, क्योंकि यह अप्रभावी ही नहीं संक्रामक हो सकता है। पर लोग उसी मास्क को रोज पहन रहे हैं। प्रधानमंत्री कह रहे हैं, फ्लू का भय दूर भगाएं। भगाने वाले आप ही तो हैं, जनता कहां से भगाएगी।
यू. सी. पाण्डेय,  द्वारका, दिल्ली

नसबंदी या गोलबंदी
यह अजीब संयोग है कि जितने मनोयोग से दिल्ली सरकार आवारा कुत्तों की नसबंदी करके उनकी संख्या घटाने की योजना बनाती है, उससे चौगुना कुत्तों की संख्या हर साल बढ़ जाती है। पिछले साल करोड़ों रुपए खर्च कर कुत्तों (हजारों की संख्या में) की नसबंदी की गई, लेकिन सड़कों पर कुत्तों की संख्या में कोई कमी नहीं है। पता नहीं सरकार और नसबंदी करने वाली गैर-सरकारी संस्था में कैसा समन्वय है? ऐसे ही हालात रहे तो शहर कुत्तों का कारखाना बन जाएगा।
प्रवीण पंकज, गणोश नगर, दिल्ली

जसवंत जी घबराइए मत
माननीय जसवंत जी को अपनी पुस्तक में जिन्ना की तारीफ पर भाजपा ने पार्टी से निकाल दिया है। जिस पर वे बहुत बेचैन और दुखी हैं। जसवंत सिंह जी ने अपने व्यक्तिगत विचार दिए हैं, जो कि कोई बुरी बात नहीं है। यदि हैं भी तो इसका फैसला जनता करेगी, क्योंकि जनता सभी पार्टी से ऊपर होती है। इसलिए जसवंत सिंह जी न घबराएं, समाज सेवा करने की जरूरत है। पार्टी की इस हरकत का असर महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव पर भी दिखाई अवश्य देगा।
वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

घाट पर सत्याग्रही
नदियों को प्रदूषण व अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए ‘गंगा-यमुना सत्याग्रह’ और ‘मानुषी’ द्वारा शिविर में ‘नदी आजादी यात्रा’ का शुभारंभ किया गया। कलेजे में ठंडक सी दौड़ गई। फिर लगा कि पहाड़ों से स्वच्छ निकलती नदियां नगरों में पहुंच कर ही क्यों मैली हो जाती हैं? क्या कभी राज्यों के विकास के लिए पैकेज मांगने वाली सरकारों ने नदियों की सफाई के लिए पैकेज की मांग की है? आकार तो बढ़ा है, किन्तु नदियों का नहीं, बल्कि नगरों के नालों का।
राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

गरीब सुखनवर
ए गरीब सुखनवर
मेहनत में ना कसर कर
रूखी-सूखी खा
और बसर कर
ना बदलें हालात
तो खबर कर।
वीरेन कल्याणी, शाहदरा, दिल्ली

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