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यूपीएससी में कोटे पर फैसला सुरक्षित

यूपीएससी में कोटे पर फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस विवादास्पद मुद्दे पर निर्णय सुरक्षित रखा कि संघ लोक सेवाओं में योग्यता के आधार पर चुने गये आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को क्या आरक्षित पद पर नियुक्त किया जाये अथवा सामान्य वर्ग में। पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई छह दिन चली जिस दौरान मैराथन दलीलें दी गयीं।

इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश केजी बालकृष्णन, न्यायमूर्ति एसएच कापडिया, न्यायमूर्ति आरवी रवीन्द्रन, न्यायमूर्ति पी सुदर्शन रेडडी और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम शामिल थे। इस सुनवाई का इसलिए महत्व है कि इसका यूपीएससी द्वारा पदों के आवंटन के लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया के साथ साथ प्रभावित उम्मीदवारों पर असर पड़ सकता है। मामले को संविधान पीठ के पास भेजते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा था, इस मुददे पर प्राधिकत उद्धघोषणा की जरूरत है।

जिन विवादास्पद मुददों पर पीठ को निर्णय करना था उनमें यह भी था कि क्या आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों अर्थात अन्य पिछड़ी जति, अनुसूचित जति और अनुसूचित जनजति के उम्मीदवार जो मेरिट के आधार पर चुने जाते हैं और सामान्य या अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की सूची में रखे जाते हैं, उन्हें सेवा आवंटन के समय क्या आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार माना जा सकता है।

पूरे मामले का ध्यान लोक सेवा परीक्षा नियम 16(2) था जिसे 2005 में संशोधित किया गया था और यह कहता है कि मेरिट पर अनारक्षित या सामान्य वर्ग में चुना गया कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार प्राथमिकता आधार पर पद आवंटन में आरक्षित वर्ग का माना जा सकता है।
      
मद्रास हाई कोर्ट ने हालांकि इस नियम को असंवैधानिक करार दिया था जिसके बाद केंद्र और प्रभावित उम्मीदवारों ने अपीलें दाखिल कीं। प्रभावित उम्मीदवार दोनों वर्गों के थे क्योंकि हाई कोर्ट की व्यवस्था के बाद सूची में शामिल अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग में चयनित आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को समाहित करने के लिए सूची से हटाना पड़ सकता है।

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