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छात्र हितों के लिए आंदोलन की जरूरत

हेमवती नंदन बहुगुणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक-कर्मचारियों के हितों को लेकर आंदोलन की आग अब अन्य स्थानों पर फैलने लगी है। छात्र नेताओं ने गढ़वाल विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद हमेशा के लिए बनने वाले आर्डिनेंस के लिए जन आंदोलन चलाये जाने का आह्वान किया है।

मुख्यालय स्थित गढ़वाल मण्डल विकास निगम के रुद्रा काम्पलैक्स में पत्रकारों से वार्ता करते हुए केन्द्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र नेता भूपेन्द्र भण्डारी ने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए छात्रों के साथ ही शिक्षक-कर्मचारियों ने संघर्ष किया है, किंतु आज उन्ही के हकों को नजरअंदाज किया जा रहा है। केन्द्रीय विश्वविद्यालय अब पहाड़ के छात्रों के लिए अभिशाप बन रहा है।

उन्होंने कहा कि जहां छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है, वहीं 15 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे 250 से अधिक शिक्षकों के सम्मुख रोजी रोटी का संकट पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब अलीगढ़, बनारस और दिल्ली केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र हितों की रक्षा के लिए नियम बन सकते हैं, तो फिर गढ़वाल विश्वविद्यालय में क्यों इन नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने पहाड़ के युवाओं को केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर में 50 फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग की है।

इस अवसर पर कांग्रेस के पूर्व प्रान्तीय महामंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद यहां के छात्र एवं शिक्षकों के हितों पर हमला नहीं किया जाना चाहिए। यहां की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही केन्द्रीय विश्वविद्यालय में नियम बनने चाहिए। इसके लिए जनपद में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी और जल्द ही संघर्ष समिति का गठन किया जाएगा। इस अवसर पर कांग्रेस के मोहन सिंह सिंधवाल, सुरेन्द्र सिंह विष्ट, मधुसूदन जोशी आदि उपस्थित थे।

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