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सीधे बैठो, सादे बैठो, बुद्धू बन कर कभी न बैठो

सीधे बैठो, सादे बैठो, बुद्धू बन कर कभी न बैठो

कम्प्यूटर पर गेम खेलते समय तुम की बोर्ड पर झुक कर बैठ जाते हो। तुमको कभी कमर के बल लेट कर पढ़ना अच्छा लगता है तो कभी पेट के बल लेट कर दोनों कोहनियों को टिका कर हथेलियों को गाल पर लगा कर, दोनों टांगों को हिला कर पढ़ने में मजा आता है। लेकिन तुमने कभी सोचा है कि तुम्हारे पड़ोस में 50 साल के रवि अंकल क्यों अक्सर कमर को आगे झुका कर चलते हैं। कविता आंटी भला क्यों हमेशा कमर के और गर्दन के दर्द से कराहती रहती हैं। और रोहित भाई भी कुछ ऐसे ही परेशान हैं कि हर दो दिन में डाक्टर के चक्कर लगाते हैं। बच्चो, तुमको मालूम होना चाहिए कि बचपन में हम जिन बातों को हलके में लेते हैं, वही बातें बड़े होने पर उम्र भर का दर्द बन जाती हैं।

बच्चो, तुमने कभी किसी को लेट कर खाते या फिर खड़े होकर सोते हुए देखा है? नहीं देखा न! बच्चो हमारा उठने, बैठने का तरीका हमारे जीवन पर विभिन्न तरह से प्रभाव डालता है। सही तरीके से बैठना, सोना, खड़ा होना सही बॉडी पोस्चर कहलाता हैं। सही बॉडी पोस्चर हमारी पर्सेनेलिटी को प्रदर्शित करता है।

पढ़ाई करने का सही बॉडी पोस्चर कुर्सी-मेज पर बैठने से होता है। तुम जब भी कुर्सी पर बैठो तो आगे की ओर कमर झुका कर मत बैठा करो। किताब को अपनी आंखों से सीमित दूरी पर रखा करो। पढ़ते समय लाइट किताब पर सीधे पड़नी चाहिए। इससे तुमको गर्दन झुका कर पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसी तरह कम्प्यूटर पर कोई काम करते समय स्पेशल कम्प्यूटर कुर्सी-मेज का प्रयोग किया करो। पढ़ते समय और कम्प्यूटर पर जब भी बैठो तो पीठ को आराम से पीछे टिका कर बैठा करो और अपने दोनों पैरों को आगे की ओर सीधा रख कर बैठा करो। देर तक बैठने के लिए पीठ के पीछे कुशन का प्रयोग करोगे तो तुम्हें और आराम मिलेगा। कम्प्यूटर कीबोर्ड को जितना हो सके, ऊंचाई पर रखना चाहिए। कीबोर्ड इतनी ऊंचाई पर होना चाहिए कि तुम्हारी रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और तुम्हें अपनी कमर को झुकाने की जरूरत न पड़े। दोस्तो, तुमको बाजार में राइटली-डिजाइन्ड कुर्सियां भी मिल जाएंगी, जिन पर तुम रिलेक्स होकर बैठ सकते हो।

तुम्हारी पीठ में 28 रीढ़ की हड्डियां होती हैं, जिनमें से 7 गर्दन, 12 बैक में, 5 कमर और 4 कमर से नीचे होती हैं। इनमें से गर्दन और कमर की हड्डियां सबसे अधिक हिलती हैं। दोस्तो, तुम स्कूल में फिर घर पर लगभग आठ से नौ घंटे ऐसा काम करते हो, जब तुम्हारी गर्दन और कमर की डिस्क सबसे ज्यादा घिसती है। डिस्क हमारे शरीर में कुशन की तरह होती है। सही ढंग से नहीं बैठने पर इस पर गलत प्रभाव पड़ता है। तुमने अपने आस-पड़ोस में कई लोगों को कमर के  और गर्दन के दर्द से कराहते हुए देखा होगा। ऐसा नहीं कि उनको वह दर्द अचानक बड़े होने पर ही हुआ है। वह जब तुम्हारी उम्र के रहे होंगे तो उन्होंने भी मस्ती में रह कर अपने उठने-बैठने के तरीकों पर ध्यान नहीं दिया। इसी का परिणाम यह है कि आज वह अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।  दोस्तो, तुम्हें बड़े होने पर गर्दन और कमर के दर्द से परेशान नहीं होना है। इसके लिए तुम्हें अपने बॉडी पोस्चर पर तो ध्यान देना ही है, साथ ही एक्सरसाइजेज और आसन भी करने हैं। कमर के लिए हमेशा पीछे झुकने वाली एक्सरसाइज करनी चाहिए। ऐसे एक्सरसाइजेज को एक्सटेंशन एक्सरसाइज कहते हैं। तुम रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए धनु आसन भी कर सकते हो।

तुममे से बहुतों को झूले वाले बिस्तरों पर सोना अच्छा लगता है, लेकिन तुम्हें केवल लकड़ी और लोहे के बिस्तर पर ही सोना चाहिए। बिस्तर पर हल्का गद्दा बिछा कर सोना ठीक है और सोते समय मोटा तकिया लेकर नहीं सोना है। तुम्हें केवल 3से 4 इंच तक के तकिए का प्रयोग करना चाहिए। ज्यादा ऊंचा तकिया रखने से गर्दन और कमर पर गलत प्रभाव पड़ता है। जब तुम सुबह जगो तो सीधे झटके के साथ बिस्तर से मत उठा करो, किनारे से करवट लेकर, आराम से दोनों हाथों को आगे टिका कर बिस्तर से उठा करो। बच्चो, यदि किसी गाड़ी को ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर जबरदस्ती चलाओगे तो गाड़ी के सारे पार्ट ढीले हो जाएंगे। इसी तरह तुम्हारी बॉडी भी है, जिस पर तुम्हारे गलत उठने, बैठने, सोने से बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

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