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विदेश व्यापार नीति घोषित, 2020 तक विश्व व्यापार होगा दोगुना

विदेश व्यापार नीति घोषित, 2020 तक विश्व व्यापार होगा दोगुना

सरकार ने निर्यात में गिरावट को रोकने और इसमें 2010-11 तक 15 फीसद वृद्धि हासिल करने की घोषणा के साथ गुरुवार को 2009-14 की विदेश व्यापार नीति की घोषणा की।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने नई नीति की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से अगले वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान देश का निर्यात बढ़कर 200 अरब डालर का हो जाएगा।

शर्मा ने कहा कि इस नीति का लक्ष्य निर्यात में गिरावट के रुख को रोकना और विपरीत दिशा में मोड़ना है। दो साल बात इस नीति की समीक्षा की जाएगी।

मंत्री द्वारा घोषित उपायों में निर्यातोन्मुखी (ईओयू) इकाइयों के लिए आयकर छूट की अवधि में एक साल तक बढ़ोतरी, शुल्क रिफंड योजना एक साल तक जारी रखना और बाजार के विकास संबंधी योजनाओं के तहत निर्यातकों को पहले से अधिक सहायता मुहैया कराना शामिल है।

उल्लेखनीय है कि वश्विक वित्तीय नरमी से बुरी तरह प्रभावित भारतीय निर्यात में पिछले 10 महीने से गिरावट जारी है। जून 2009 को समाप्त दूसरी तिमाही के दौरान निर्यात में 31 फीसद की गिरावट दर्ज हुई।

वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान भारत का निर्यात 168 अरब डालर था। मंत्री ने 2010-11 तक इसे 200 डालर करने का लक्ष्य रखा है।

केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने गुरुवार को नई दिल्ली में संप्रग सरकार की पहली विदेश व्यापार नीति की घोषणा की। वर्ष 2009 से 2014 तक की इस नीति की समाप्ति तक देश से माल एवं सेवाओं के निर्यात को दोगुना करने और वर्ष 2020 तक विश्व व्यापार में भारतीय निर्यात के हिस्से को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया है। सामानों के विश्व बाजार में वर्ष 2008 तक भारत का हिस्सा करीब डेढ़ प्रतिशत और वाणिज्यिक सेवाओं के व्यापार में 2.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

शर्मा ने कहा कि नई विदेश व्यापार नीति के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मिले जुले नीतिगत उपाय किए गए हैं जिनमें वित्तीय प्रोत्साहन, संस्थागत परिवर्तन, प्रक्रियात्मक सुधार और दुनियाभर के नए बाजारों में पहुंचने के लिए नए सीरे से प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नीति में रोजगारोन्मुख क्षेत्रों जिनमें वस्त्र, चमडा़, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों पर विशेष बल दिया गया है। निर्यातकों की डालर कर्ज की जरुरतों को समय पर पूरा करने के लिए वित्त सचिव, वाणिज्य सचिव और भारतीय बैंक संघ के अध्यक्ष की एक समिति गठित की गई है जो कि इस प्रायोजन के लिए समय समय पर बैठक करती रहेगी।

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