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दो टूक (27 अगस्त, 2009)

हमारी एक विशेष खबर पाठकों को बता रही है कि किस तरह सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों ने बीआरटी कॉरिडोर के डिजाइन पर आपत्ति की है। जज इस बात से नाराज बताए जाते हैं कि इस डिजाइन की वजह से कोर्ट में घुसने का उनका रास्ता बंद हो रहा है। कोर्ट की आपत्ति की अपनी वजह होंगी।

ट्रेजडी मगर यह है कि इसी बीआरटी कॉरिडोर से जब हजारों-लाखों दिल्लीवासियों का सफर मुहाल हो रहा था, जब आए दिन लोग इस नामुराद डिजाइन से बेमौत मर रहे थे, तब किसी के मन में विक्रमादित्य क्यों नहीं जागा। सर्वोच्च सिंहासनों पर बैठी हस्तियों को तब दया क्यों नहीं आई। क्या आम नागरिकों की बदहाली, उनकी तकलीफों पर भी किसी का दिल पसीजेगा?

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  • Web Title:दो टूक (27 अगस्त, 2009)