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बीमा के सूत्र

इंश्योरेंस कराते वक्त अकसर कुछ बुनियादी बातों की जानकारी न होने के कारण छोटी सी चूक कर बैठते है। ऐसे में जरूरी है कि कुछ बातों की जानकारी कर ली जाए।

कंपनी से सौदेबाजी करें : यदि आप सीधे कंपनी से इंश्योरेंस खरीद रहे हैं, तो उससे सीधे बेहतर रेट के लिए सौदेबाजी कर सकते हैं। आमतौर पर कंपनियां अपने दामों में काफी गुंजइश रखती हैं। 

ब्रोकरों से करें तफ्तीश : पॉलिसी खरीदने से पहले कई ब्रोकरों के चक्कर लगा लेने चाहिए। ये ब्रोकर वैसे तो किसी एक कंपनी का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे इनका कई कंपनियों से करार होता है।

डिस्काउंट के पेंच : डिस्कांउट मिलने के चक्कर में सुरक्षा कवर से समझोता न करें। क्योंकि आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा होती है। डिस्काउंट के चक्कर में वह इंश्योरेंस में इधर-उधर कुछ कटौती कर देते हैं। जिससे आपको लगने लगता है कि डिस्काउंट मिल गया लेकिन बाद में मैच्योरिटी के दौरान यह बात सामने आने पर मुश्किलदायक होता है। वहीं डिस्काउंट के चक्कर में मिलने वाले कुछ अतिरिक्त इंश्यारेंस कवर कम कर दिए जाते हैं। इसलिए इसके बारे में पूरी पड़ताल कर लें।

कांप्रिहेंसिव पॉलिसी : एक कांप्रिहेंसिव पॉलिसी के दायरे में कार की चोरी या क्षति, पैसेंजर के साथ ही थर्ड पार्टी की देनदारी भी शामिल होती है।

इंश्योर राशि : अपनी कार को डिक्लेयर वल्यू पर इंश्योर्ड कराएं। इंश्योर्ड डिक्लेयर वैल्यू वह होती है जो कंपनी आपको कार के चोरी होने या क्षतिग्रस्त होने पर अदा करती है। इसलिए यह काफी जरूरी बन जता है कि सही इंश्योरेंस राशि के बारे में पता कर लिया जाए।

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