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27 नवंबर, 2020|2:13|IST

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अहिंसा के मायने

गांधी कहते हैं कि मेरी अंहिसा इस बात की इजाजत नहीं देती कि खतरा सामने देखकर अपने प्रियजनों को असुरक्षित छोड़कर खुद भाग जाओ। हिंसा और कायरतापूर्ण पलायन में से मैं हिंसा को तरजीह दूंगा। अहिंसा कायरता की आड़ नहीं है, बल्कि यह वीर का सर्वोच्च गुण है। अहिंसा के व्यवहार के लिए तलवारबाजी से ज्यादा वीरता की जरूरत है। कायरता और अहिंसा का कोई मेल नहीं है। तलवारबाजी को छोड़कर अहिंसा को अपनाना संभव है और आसान भी है।
अहिंसा की पूर्व शर्त यह है कि अहिंसक व्यक्ति में वार करने की क्षमता हो। अहिंसा मनुष्य की प्रतिशोध लेने की भावना का सचेतन और जाना-बूझ संयमन है। अहिंसा के मार्ग का पहला कदम यह है कि हम अपने दैनिक जीवन में परस्पर सच्चाई, विनम्रता, सहिष्णुता और प्रेममय दयालुता का व्यवहार करें। एक कहावत है कि ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है। नीतियां तो बदल सकती हैं, मगर अहिंसा का पंथ अपरिवर्तनीय है। अहिंसा का अनुगमन उस समय करना आवश्यक है, जब हमारे सामने चारों ओर हिंसा का नंगा नाच हो रहा हो। अहिंसक व्यक्ति के साथ अहिंसा का व्यवहार करना कोई बड़ी बात नहीं है। यह कहना कठिन है कि इस व्यवहार को अहिंसा कहा भी जा सकता है या नहीं। लेकिन अहिंसा जब हिंसा के मुकाबले खड़ी होती है, तब दोनों का फर्क पता चलता है। ऐसा करना तब तक संभव नहीं है, जब तक कि हम निरंतर सचेत, सतर्क और प्रयासरत न रहें।

दरअसल गांधी ने यह कहा था कि आप किसी समस्या के ज्यादा से ज्यादा विकल्प खोजते जाएं और हिंसा का रास्ता न अपनाएं। जब गांधी यह कहते हैं कि आप विकल्प खोजते जाएं तो इसके मायने ये हैं कि आप भरपूर सोचें, मनन करें और अपने विवेक का उपयोग करें। अहिंसा का मार्ग हिंसा के मार्ग की तुलना में कहीं ज्यादा साहस की अपेक्षा रखता है।

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  • Web Title:अहिंसा के मायने