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प्रशासनिक उपेक्षा से बाढ़ पीड़ितों में रोष

 अमौर एवं बैसा प्रखंड में नदियों के बेग में कमी आने से क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ है, किन्तु क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति अभी भी गम्भीर बनी हुई है। इन दोनों प्रखंडों में विगत एक सप्ताह से बाढ़ ने जो तांडव किया है और उससे जो क्षति हुई है उसका तो सही आकलन कर पाना कठिन है, किन्तु बाढ़ के दौरान प्रशासनिक तंत्र द्वारा बाढ़पीड़ितों की जो उपेक्षा की गई है, उससे प्रशासन की मानवीय संवेदन शून्यता स्पष्ट रूप से उजागर हो गई है।

क्षेत्र के बाढ़पीड़ितों के अनुसार बाढ़ के दौरान सरकारी स्तर पर कहीं कोई राहत व बचाव कार्यक्रम नहीं चलाया गया है। बाढ़ से घिरे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा बाढ़ग्रस्त इलाकों में आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कहीं कोई सरकारी या गैर सरकारी नाव की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई है।  बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिनियुक्त सहाय प्रभारी एवं पर्यवेक्षक कहां ड्यूटी बजा रहे है इसका कहीं कोई अता-पता नहीं है।

बाढ़ से उत्पन्न विभिन्न संक्रामक रोग की रोकथाम के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रोंमें कहीं कोई स्वास्थ्य चिकित्सा दल नजर नहीं आ रहा है। इन दोनों प्रखंडों में बाढ़ की भयावह स्थिति से निपटने के पूर्व की सभी प्रारंभिक तैयारियां पूरी किये जाने के दावे सरकारी फाइलों में ही सिमटकर रह गयी है। धरातल पर इसका कहीं कोई अमल नहीं हुआ है।

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  • Web Title:प्रशासनिक उपेक्षा से बाढ़ पीड़ितों में रोष