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चरमरा सी गयी सदर अस्पताल की व्यवस्था

 डॉक्टरों की कमी ओर मरीजों की बढ़ती भीड़ के आगे सदर अस्पताल की व्यवस्था चरमरा सी गयी है। आउटडोर में जहां मरीजों को डाक्टर के इंतजार में घंटो बैठकर इंतजार करने के बाद भी बिना इलाज करवाये जाने की मजबूरी बनी हुई है, वहीं इनडोर में बेड़ खाली ना होने की वजह से नए भर्ती होने वाले मरीजों के समक्ष परेशानी खड़ी हो रही है।

गोबरगढ़ा से सुबह सात बजे किनले सुरेन्द्र कुमार यादव की 3 वर्षीया पुत्री गीता बुखार से तप रही थी। ओपीडी में पूर्जा कटाने के बाद शिशु विशेषज्ञ कक्ष के ताले लगे दरवाजे के पास बैठ उसे तीन घंटे से ज्यादा बीत गये। तब किसी ने बताया कि अस्पताल में बच्चों का डॉक्टर नहीं है। पूर्जा काटने वाले ने बाद में उसे पुरुष कक्ष में भेज दिया। वहां से भी डॉक्टर साहब उठकर पोस्टमार्टम के लिए निकल चुके थे।

नतीजतन परेशान वापस लौटते सुरेनद्र ने बताया कि इतने बड़े हॉस्पीटल में बच्चे को देखने के लिए जब डॉक्टर तक नहीं है तो और सुविधा क्या मिलेगी, समझ जा सकता है। इस संबंध में पूछे जाने पर अस्पताल उपाधीक्षक डा. वी.एस. यादव बताते हैं कि शिशु रोग विशेष डा. बी.पी. मोदक के स्थानांतरण के बाद किसी नये डॉक्टर ने अबतक योगदान नहीं दिया है। वैसे डा. आर. सी. प्रसाद को कहा गया है कि वे बच्चों को भी देख लें।

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