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शहर के टॉमियों के दिन फिरे, होगा पुनर्वास

प्लीज हमें आवारा न कहें। हम सड़कों पर बेबस लाचार जरूर घूमते हैं, मगर ना तो हम कहीं डाका डालते हैं और ना ही चोरी करते हैं। हम तो कहीं भीख भी नहीं मांगते। बगैर छेड़े हम तो किसी पर भौंकते तक नहीं। आईपीसी की किसी धारा का उल्लंघन नहीं करते, पीपुल फॉर एनिमल से जुड़ी शुक्ला ने मिनी सेक्रेटेरियट में आयोजित सेमिनार में ये बातें कहीं।

वे कुत्तों की बात कर रही थीं, जिन्हें लोग आवारा कहते हैं। पिछले दिनों शहर के आवारा कुत्तों की नसबंदी का फैसला निगम ने लिया। अब निगम शहर के तमाम कुत्तों के प्रति सह्रदयता दिखा रहा है। निगम आयुक्त राजेश खुल्लर ने इस मौके पर घोषणा की कि निगम हर कु्त्ते की देखभाल के लिए संस्थाओं को 445 रुपये देगा। इसमें कुत्तों के वक्सीनेशन से लेकर उनकी नसबंदी तक सारे उपचार किए जाएंगे।

हर आरडब्लूए का यह कर्तव्य होगा कि वह अपने इलाके के बीमार कुत्तों की जानकारी इस काम में लगाई गई संस्थाओं को दें। इसके लिए पीपुल फॉर एनिमल और फ्रेंडीकोस नाम की दो संस्थाओं को लगाया गया है। ट्रेंड कुत्तों को पकड़ने वाले डॉग कैचर शहर के कुत्तों को पकड़ेंगे। उनके इलाज की तमाम जिम्मेदारी संस्थाओं की होगी। कुत्तों को कोई रोग न हो इस बात का खयाल रखा जाएगा। कुत्तों की नसबंदी से उनकी जनसंख्या पर नियंत्रण होगा।

प्रतिमाह 400 कुत्तों को निरोग और स्वस्थ करने का लक्ष्य रखा गया है। हर इलाके का आरडब्लूए यहां पर्यवेक्षक का काम करेगा। कार्यक्रम में निगम के एडिशनल कमिश्नर चंद्रप्रकाश भी शामिल थे।

 

 

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