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सरकार की चैनलों पर नकेल कसने की तैयारी

सरकार की चैनलों पर नकेल कसने की तैयारी

सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बुधवार को टेलीविजन चैनलों से कहा कि सरकार पर संसद और समाज की तरफ से इस बात का भारी दबाव पड रहा है कि चैनलों से प्रसारित सामग्रियों पर अंकुश रखने के लिए किसी न किसी तरह का नियमन बने।

सोनी ने कहा कि टेलीविजन चैनलो की सामग्रियों पर नियंत्रण के लिए कोई न कोई निकाय बनाया जाना हालांकि जरुरी हो गया है लेकिन उन्होंने साफ किया कि सरकार मीडिया की स्वतंत्रता में किसी तरह की कटौती नहीं करेगी।

उन्होंने बुधवार को यहां मीडिया पर एक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार मीडिया की सृजनात्मकता पर रोक लगाने के लिए कोई तानाशाहीपूर्ण तंत्र नहीं बनना चाहती है लेकिन इसके लिए ऐसे कुछ व्यापक नियम होने चाहिए और इनका पालन किया जाना चाहिए।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सामग्रियों पर नियत्रंण रखना बहुत ही मुश्किल काम है और उनका मंत्रालय यह काम नहीं करना चाहता है बल्कि इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों से संबंद्ध लोगों एवं प्रतिनिधियों का एक निकाय होना चाहिए जो चैनलों से प्रसारित होने वाली सामग्रियों पर निगरानी रखे।

सोनी ने कहा कि एक ऐसा तंत्र होना चाहिए कि लोगों को कोई आपत्ति या शिकायत हो तो वे वहां अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसे विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा संसद के बजट सत्र के दौरान सांसदों ने कई टेलीविजन धारावाहिकों को लेकर गहरी आपत्तियां उठाई है।

मौजूदा टी आर पी (टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट) व्यवस्था के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में प्रत्यक्ष तौर पर शामिल नहीं है लेकिन टेलीविजन चैनल चाहते हैं कि यह व्यवस्था खत्म हो। उन्होंने कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह एक प्रणाली बनाए ताकि यह जाना जा सके कि देश के ज्यादातर लोग क्या देखना चाहते हैं।

उन्होंने बताया कि उनका मंत्रालय टेलीविजन चैनलों के मामले में 49 प्रतिशत एफ डी आई के एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि हालांकि वह इस क्षेत्र में अधिक विदेशी पूंजी के पक्ष में है लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें इस पर भारी आपत्तियां हैं और इसलिए या तो हमें इन लोगों को सहमत करना चाहिए या हमें उनसे सहमत होना चाहिए। जहां तक अखबारों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का मामला है उन्होंने कहा कि यह मामला वित्त मंत्रालय के पास है।

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