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स्वाइन फ्लू से मरने वालों में सबसे ज्यादा युवा

स्वाइन फ्लू से मरने वालों में सबसे ज्यादा युवा

स्वाइन फ्लू से दुनिया भर में मरने वालों में आधे से अधिक संख्या युवाओं की है। यह बात दुनिया भर में एच1एन1 वायरस से हो रही मौत के आंकड़े के आधार पर किए गए पहले सर्वे में सामने आई है।

यह अध्ययन यूरोपियन सेंटर फार डिजीज प्रीवेन्शन एंड कंट्रोल की निगरानी शाखा यूरोसर्विलान्स ने किया है।

जुलाई के मध्य में 28 देशों में स्वाइन फ्लू से 574 लोगों की मौत हुई। इस आंकड़े का विश्लेषण किया गया और इस सप्ताह नतीजे जारी किए गए। विश्लेषण में पाया गया कि इस बीमारी से मौत का खतरा मधुमेह या मोटे लोगों को अधिक होता है। शुरूआती खबरों में कहा गया था कि बच्चों और बुजुर्गों को स्वाइन फ्लू होने की आशंका अधिक होती है। लेकिन अध्ययन में ऐसा संकेत नहीं मिला।

अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि मरने वालों में 51 फीसदी लोग 20 से 49 साल की उम्र के थे। लेकिन अलग-अलग देशों और महाद्वीपों में यह आंकड़ा अलग-अलग हो सकता है। स्वाइन फ्लू से मरने वालों में 60 साल या इससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या 12 फीसदी रही।

सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आंकड़ों से देखें तो पता चलता है कि स्वाइन फ्लू से युवा, वयस्कों और मोटे लोगों की मृत्यु दर अधिक है। लेकिन बच्चों और बुजुर्गों की मृत्यु दर अधिक नहीं है, जबकि मौसमी फ्लू में स्थिति इससे विपरीत होती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मौसमी फ्लू के कारण हर साल करीब 250,000 से 500,000 लोगों की मौत होती है। इनमें से 90 फीसदी से अधिक लोग 65 साल से अधिक उम्र के होते हैं।

स्वाइन फ्लू से मौत का सिलसिला जारी है। मैक्सिको में एच1एन1 वायरस से एक सप्ताह में 15 और लोगों के मारे जाने की खबर है। यहां इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या 179 हो गई है।
   
अमेरिका और अर्जेंटीना के बाद एच1एन1 वायरस के संक्रमण से तीसरा सर्वाधिक प्रभावित देश मैक्सिको है। यहां एच1एन1 वायरस के संक्रमण के मामले बढ़ कर 20,681 हो चुके हैं। यहां स्वाइन फ्लू की शुरूआत अप्रैल में हुई थी। अब देश के लगभग हर हिस्से में यह वायरस फैल चुका है।

इस बीच, हांगकांग से मिली एक खबर में बताया गया है कि आधे से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों ने स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए टीका लगवाने से इंकार कर दिया है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि स्वास्थ्य कर्मियों के टीका लगवाने से इंकार करने का कारण टीके के साइडइफैक्ट की आशंका है।
   
यहां हाल ही में किए गए एक सर्वे में बताया गया है कि करीब 30 फीसदी डॉक्टरों और नर्सों ने खुद को स्वाइन फ्लू से बचाव का टीका लगवाने से मना कर दिया।
   
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि महामारी फैल रही है और अगर डॉक्टर और नर्स बीमार हो जाएंगे तो स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह चरमरा जाएगी।

 

 

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