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ये भी है सुरक्षा का तरीका!

ये भी है सुरक्षा का तरीका!

केतन मेहता द्वारा निर्देशित 1985 में बनी फिल्म "मिर्च मसाल" आजादी से पहले की पृष्ठभूमि पर बनाई गयी थी। इसमें खेतों में काम करने वाली महिलाएं टैक्स वसूलने आये कलैक्टर की आंखों में मिर्च पाउडर डाल कर उसे भगा देती हैं। इस फिल्म को बने 24 साल बीत चुके हैं। कमोबेश इसी तरह की एक स्थिति उस समय सामने आयी, जब दिल्ली की सीमा से सटे सूर्य नगर के एक मकान को लोगों की भीड़ ने घेर लिया। उस समय इस मकान में दो महिलाएं भी थीं-17 वर्षीया ज्योति कुमार और 30 वर्षीया आशा भारद्वाज। घर को घेरने आई भीड़ का मकसद घर को आग लगाना था। भीड़ में से ही कुछ लोग घर की छत पर चढ़ गये। उन्होंने घर के दरवाजे भी तोड़ डाले। बताया गया कि वे घर को आग लगा देना चाहते थे। इन दोनों महिलाओं ने लगातार पुलिस को फोन किया, लेकिन इसके बावजूद पुलिस नहीं आई। ऐसे में इन दोनों महिलाओं के पास ऐसा कौन-सा रास्ता बचता था, जो इन्हें भीड़ के उस आतंक से मुक्त करा सके। भीड़ बराबर घर को आग लगाने की कोशिश में थी। ऐसे में भी इन दोनों ने हिम्मत नहीं हारी और अपने बचाव के रास्ते सोचती रही। अंत में उन्हें याद आया कि घर में मिर्च पाउडर रखा हुआ है। बस, जैसे ही लोगों ने घर को आग लगाने की कोशिश की, इन दोनों ने भीड़ की आंखों में मिर्च पाउडर डाल दिया। उसके बाद भीड़ वहां से तितर-बितर हो गयी। इस कहानी के आपराधिक पक्ष चाहे जो हों, लेकिन यह कथा बताती है कि महिलाएं किस तरह आपात स्थिति में खुद को बचाने के लिए मिर्च पाउडर या अन्य तीखे मसालों का प्रयोग कर सकती हैं। शायद मिर्च मसाला फिल्म भी इसी ओर इशारा करती थी कि खुद को सुरक्षित रखने के लिए महिलाएं मिर्च मसाले का इस्तेमाल बाकायदा कर सकती हैं। और आज वे ऐसा कर रही हैं।

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