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भूखे भारत की तस्वीर उतारने की बढ़ती भूख

भूखे भारत की तस्वीर उतारने की बढ़ती भूख

मुन्ना भाई एमबीबीएस में जब संजय दत्त उर्फ मुन्ना, सर्किट को फोन कर एक बॉडी लाने को कहता है तो सर्किट ऐसे पर्यटक को फंसाता है, जो ‘गरीब और भूखा इंडिया’ देखना चाहता था। पता नहीं यह बात खुश होने की है या अपने गिरेबान में झांकने की पर गरीबी और गंदगी पर्यटकों को भा रही है। लोग मलिन बस्तियों में मैले-कुचैले कपड़े पहने लोगों की तस्वीरें उतारना चाहते हैं।

‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के बाद भारतीय गरीबों का साक्षात दर्शन करने में विदेशियों की रुचि बढ़ गई है। नतीजन गरीब बच्चों और गरीबी के अन्य प्रतीक चिन्हों को पर्यटन का हिस्सा बनाकर मोटी कमाई करने वाली कई कंपनियां  मैदान में आ गई हैं।

दो-तीन साल पहले फिल्मकार मीरा नायर के सलाम बालक ट्रस्ट द्वारा शुरू किए  ‘सिटी वॉक’ का मकसद उन बच्चों की आपबीती से विदेशी पर्यटकों को वाकिफ कराना था जो सड़कों और रेलवे स्टेशनों पर सालों तक  लावारिस जिंदगी बिताने के बाद सलाम बालक ट्रस्ट की मदद से सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।

लेकिन अब गरीबी पर्यटन या ‘पुअरिज्म’ कराने वाली दुकानें पूरे भारत भर में फैल गई हैं। स्ट्रीट चाइल्ड के तौर पर दिल्ली की सड़कों पर कई साल बिताने के बाद सलाम बालक ट्र्स्ट से जुड़े जावेद ने कई ऐसे सिटी वॉक कराए, जिसमें पर्यटकों से 2 घंटे के टूर के लिए 200 से 300 रुपये लिए जाते हैं और उन्हें पहाड़गंज और रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाके में स्ट्रीट चिल्ड्रन की ‘असली जिंदगी’ दिखाई जाती है।

‘हिन्दुस्तान से बातचीत में जावेद कहता है, ‘ सिटी वॉक का मकसद इन बच्चों की जमीनी सच्चई से लोगों को वाकिफ कराना और उनके प्रति लोगों के मन में संजीदगी पैदा करना था। हम अभी भी देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए सिटी वॉक आयोजित करते हैं। लेकिन अब कई लोगों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है।’ मुंबई में धारावी और कमाठीपुरा के बच्चों की जिंदगी की नुमाइश के काम में मुंबई की रियल टूर एंड ट्रेवल्स कंपनी और ग्लोबल एक्सचेंज जैसे कई कंपनियां और संगठन लगे हैं।

गरीबी देखकर द्रवित विदेशी पर्यटक डॉलर और पाउंड फेक रहे हैं। रियल टूर एंड ट्रेवल के कृष्णा पुजारी कहते हैं कि स्लमडॉग के बाद विदेशियों की दिलचस्पी धरावी जाकर गरीब बच्चों की जिंदगी देखने में बढ़ गई है। वैसे, इस मामले में सरकारी राय थोड़ी अलग है। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनी राष्ट्रीय आयोग की सदस्य संध्या बजज कहती हैं, ‘अगर यह हो रहा है तो आपत्तिजनक है। गरीबी को बेचा जा रहा है। हमें अभी तक इस बात की जानकारी नहीं है। हम इस पर अतिरिक्त जानकारी मंगाएंगे।’

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