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28 फरवरी, 2020|6:00|IST

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दो टूक (26 अगस्त, 2009)

लड़कियों के वजूद से जुड़ी दो खबरें आप आज के अखबार में पढ़ेंगे। एक खबर बताती है कि दिल्ली में प्रति एक हजार लड़कों पर लड़कियों का अनुपात बढ़कर 1004 हो गया है। दूसरी खबर बताती है कि नांगलोई में पुलिस ने ऐसा गिरोह दबोचा जो लड़कियों को अगवा कर दूसरे राज्यों में बेच देता था। एक खबर आश्वस्त करती है कि चलिए जन्म के स्तर पर तो भेदभाव कुछ कम हुआ। लेकिन दूसरी खबर सोचने पर मजबूर करती है।

अगर जन्म के बाद ये बर्ताव होना है तो फायदा क्या हुआ? तरक्की कहां हुई? प्रशंसा करनी होगी कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ सक्रिय लाखों समाजसेवियों और सरकारी - गैर सरकारी संगठनों की, जिनकी वजह से दिल्ली का जेंडर प्रोफाइल बदला। अब उम्मीद है, वे भी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे जिनके कंधों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने की  जिम्मेदारी है।

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  • Web Title:दो टूक (26 अगस्त, 2009)