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23 फरवरी, 2020|5:26|IST

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गैस विवाद पर सरकारी रुख तय

गैस विवाद पर सरकारी रुख तय

रिलायंस गैस विवाद मामले में सरकार अब खुलकर सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी के पक्ष में आ गई है। आज वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह ने साफ तौर पर एनटीपीसी के हितों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस बाबत सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका पेश करेगी। समूह के फैसले के मुताबिक रिलायंस गैस का 4.20 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू बगैर किसी पक्षपात के तय किया गया है और सरकारी कंपनी एनटीपीसी के लिए इसका 2.34 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू वाला मूल्य वास्तव में वर्ष 2004 में तय किया गया था।

सूत्रों ने फिर से यह बात दोहराई है कि केजी बेसिन रिलायंस गैस से जुड़ा एनटीपीसी का मामला और अनिल अंबानी का मामला अलग-अलग हैं। सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस बात को रखेगी कि रिलायंस खुद एनटीपीसी के मामले में फैसले करेगी क्योंकि 4.20 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू का मूल्य कवास और गंधार विस्तार परियोजनाओं के अलावा अन्य सभी बिजली संयंत्रों के लिए लागू होगा। इन दोनों परियोजनाओं के लिए खुद आरआईएल ने 2.34 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू मूल्य पर सहमति दी है।

कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि हमने इस विवाद का समाधान कर लिया है और अब आगे इस मामले में कोई बैठक नहीं होगी। इससे पहले बिजली सचिव एच.एस.ब्रहम ने कहा कि अगले छह-सात दिनों के अंदर एनटीपीसी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आरआईएल के खिलाफ स्पेशल लीव पेटीशन दायर कर सकती है। दूसरी ओर पेट्रोलिय मंत्रालय भी पहले से दायर स्पेशल लीव पेटीशन के अनुपूरक हिस्से के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मामला पेश करने की तैयारी कर रही है कि प्रोडक्शन शेयरिंग कांट्रैक्ट ही गैस का मूल्य तय करेगा ।

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