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जब रोग करे हमला, तो टीके जान बचाएं

आजकल तमाम बीमारियों से बचाव के नये-नये टीके ला रही कंपनियों का यही दावा है कि आप या आपके बच्चे बगैर वक्सीनेशन (यानी टीकाकरण) के रोग मुक्त रह ही नहीं सकते। यह बात सच भी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले साल देश में मीजल्स के करीब 55 हजार और डिप्थीरिया के 10 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे। इसी प्रकार एड्स के बाद सबसे खतरनाक समझी जाने वाली बीमारी हैपेटाइटिस-बी भी तेजी से फैल रही है। इन बीमारियों से मौत के भी कई मामले सामने आए हैं। जहिर है, इनसे बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका निरोधक टीके लगवाना है।

क्या है वैक्सीन ?
वैक्सीन लेटिन शब्द वका से बना है, जिसका मतलब होता है गाय। सबसे पहले एडवर्ड जेनर ने 1796 में आठ साल के एक बच्चे की नस में काउपॉक्स पस का टीका लगाकर वज्ञानिक तौर पर टीकाकरण की शुरुआत की थी। इसका चमत्कारी असर ये हुआ कि इस बच्चे को चेचक के मरीज के संपर्क में आने के बावजूद ये बीमारी नहीं हुई। आगे चलकर 1980 में तीसरी वर्ल्ड हैल्थ असेंबली ने ऐलान किया कि इसी टीके की वजह से इंसान चेचक की बीमारी को दुनिया से विदा करने में कामयाब हो गया है।

दरअसल, टीकाकरण में होता ये है कि किसी खास बीमारी के एंटीजेन को इसके सबसे कमजोर फॉर्म में इंजेक्शन के जरिए किसी शख्स के शरीर में प्रविष्ठ करा दिया जाता है, जो इम्यून रिस्पांस पैदा करके एंटीबॉडीज के जरिए पैथोजेन से उस व्यक्ति के शरीर की रक्षा कर देता है। 

बच्चों के टीके
बीमारियों से बचाव के लिए बच्चे के जन्म के साथ ही टीके लगाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। बच्चों के टीकों की सूची अच्छी-खासी है। सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ एचपीवी, टीबी से बचने के लिए बीसीजी, डिप्थीरिया से बचाव के लिए डीपीटी वगैरह, वगैरह। लेकिन असल में ये देखना होता है कि आपके बच्चे की जरूरत क्या है? डीपीटी और बीसीजी तो जरूरी टीके हैं। इसीलिए इन्हें भारत सरकार ने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है। इनके अलावा पोलियो, मम्स, हैपेटाइटिस आदि बीमारियों के टीके अलग से हैं। बच्चों के डॉक्टर कहते हैं कि टीके के जरिए काफी बीमारियों से बचाव संभव है, इसलिए ये जानना बहुत जरूरी है कि कौन से टीके वाकई महत्वपूर्ण हैं, और कौन से नहीं।

दिल्ली के चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के डायरेक्टर डॉ. के.के. कालरा कहते हैं: जो टीके बच्चों को लगाना वाकई जरूरी होता है, वे सभी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत मुफ्त लगाए जाते हैं। वे कहते हैं कि तमाम टीकों, स्थानीय स्तर पर बच्चों में होने वाली बीमारियों और देश में एक साल में पैदा होने वाले तकरीबन एक करोड़ बच्चों को टीके लगाने पर आने वाली लागत के गहन अध्ययन के बाद ही ऐसे जरूरी टीकों की सूची तैयार की गई है। डॉ. कालरा के मुताबिक कई प्राइवेट अस्पताल, जो डीपीटी के वरिएंट्स और बूस्टर टीकों के लिए जोर डालते हैं, असल में उनकी कोई जरूरत ही नहीं है। इन्हें प्राइवेट सेक्टर और फार्मा कंपनियां महज अपने मुनाफे के लिए प्रमोट कर रही हैं।

टीका कई घातक संक्रामक बीमारियों से बचाव का सबसे सस्ता और असरदार तरीका होता है। इन बीमारियों में टीबी, हैपेटाइटिस जसी बीमारियां शामिल हैं। विशेषज्ञों की राय में इनके प्रति जगरूकता फैलाने की काफी जरूरत है। कारण ये कि यहां लोग बच्चों को तो टीके लगवा लेते हैं, लेकिन बड़ों में टीका लगवाने की प्रवृत्ति भारत में कम ही देखी जती है। अब जाकर कुछ कॉपरेरेट कंपनियों ने इस दिशा में अच्छी पहल की है। ये कंपनियां अपने कर्मचारियों को मैनिंगोकोकल इन्फैक्शन, हैपेटाइटिस बी और फ्लू के टीके लगवाती हैं। 

बड़ों के टीके
- जोस्टर वक्सीन : साठ साल सेज्यादा उम्र के लोगों को त्वचा की बीमारी शिंगल्स से बचाव के लिए ये टीका लगाया जाता है। इसका साइड इफैक्ट है इंजेक्शन की जगह खुजली और सिरदर्द। 

- एचपीवी : 18 से 26 साल की महिलाओं को यौन सक्रियता के दौर में ये टीका लगाया जाता है। उम्र के आधार पर डॉक्टर की सलाह से इसकी तीन डोज ली जा सकती है। भारत में हर साल 74 हजार महिलाएं टीका न लगाने के कारण एचपीवी के संक्रमण से मर जाती हैं। 

- एमएमआर : महिलाओं को प्रजनन-काल में ये टीका लगवाने की सलाह डॉक्टरों द्वारा दी जाती है, ताकि संक्रमण से अजन्मे बच्चे को बचाया जा सके।

- फ्लू : इन्फ्लुएंज का टीका लगाने से दिल की बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 19 प्रतिशत और डायबिटीज के मामले में 56 प्रतिशत कम हो जाती है।

- हैपेटाइटिस ए और बी : इन जानलेवा बीमारियों का वायरस लिवर कैंसर के लिए भी जिम्मेदार होता है। हैपेटाइटिस ए वक्सीन की दो, और हैपेटाइटिस बी की तीन डोज लेनी होती है।

- टेटनस : टेटनस का एक टीका दस साल के लिए कारगर होता है।

- येलो फीवर : येलो फीवर और जापानी एंसीफलाइटिस के टीके उन लोगों को लगाए जाते हैं, जो दूरदराज में काफी सफर करते हैं।

- वरसेला : ये टीका उन लोगों को गड़बड़ियों से बचाने के लिए लगाया जाता है, जिनको बचपन में चिकन पॉक्स की बीमारी न हुई हो। इसकी दो डोज लेनी होती है।

- कॅम्बिनेशन वक्सीन : कुछ टीके ऐसे होते हैं, जो एक से अधिक बीमारियों से बचाव के लिए लगाए जाते हैं। ऐसे सुपर वक्सीन में मुख्य हैं- डीपीटी, हैपेटाइटिस-बी और आईपीवी का कॅम्बिनेशन शॉट, एमएमआर और चिकनपॉक्स का शॉट, एचआईबी और डीपीटी का शॉट और हैपेटाइटिस ए और बी का सिंगल शॉट।

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