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आखिरी जागा शासन, यूपी के सभी ब्लड बैंकों की जाँच के आदेश

आखिर शासन की चुप्पी टूटी। राज्य सरकार ने प्रदेश में चल रहे सभी ब्लड बैंकों की जाँच के आदेश दिए हैं। लखनऊ के उमराई अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। लखनऊ के छत्रपति शाहूजी महाराज मेडिकल विश्वविद्यालय को निर्देश दिए गए हैं कि वह राजधानी में खून का कारोबार करने वाले रैकेट की जाँच रिपोर्ट सात दिन के अंदर दें वर्ना उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में खाद्य एवं औषधि विश्लेषकों की कमी को देखते हुए संविदा पर खाली पद भरने का फैसला किया गया है।

हिन्दुस्तान ने मंगलवार को खबर छापी कि राजधानी में खून के अवैध कारोबार का भण्डाफोड होने के बाद भी शासन चुप है। इसके लिए गठित खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए कुछ नहीं कर रहा। मंगलवार को यह चुप्पी टूटी। शासन स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद एफडीए सक्रिय हुआ। एफडीए के आयुक्त डा. ललित वर्मा ने हिन्दुस्तान को बताया कि प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने जिले में स्थित सभी ब्लड बैंकों की जाँच कर अपनी रिपोर्ट शासन को दें। राज्य में 123 पंजीकृत ब्लड बैंक हैं।

सबको निर्देश दिए गए हैं कि वह इस बात का शपथ पत्र दें कि वह ब्लड बैंक चलाने के सभी जरूरी मानक पूरे कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ के सरोजनीनगर के उमराई अस्पताल में चल रहे ब्लड बैंक का लाइसेंस निलम्बित कर दिया गया है। इस ब्लड बैंक में सोमवार को छापे में भारी गड़बड़ी मिली थीं। खून के अवैध कारोबार की जाँच पुलिस कर रही है। मेडिकल विश्वविद्यालय अपने यहाँ चल रहे ब्लड बैंक की अलग से आंतरिक जाँच कर रहा है। एफडीए ने मेडिकल विवि से सात दिन के अंदर जाँच रिपोर्ट तलब की है। एफडीए ने कहा कि ऐसा न करने पर विवि को कानूनी नोटिस दी जाएगी।

नकली दवाओं की जाँच के लिए एफडीए को कम से कम सौ औषधि विश्लेषकों की जरूरत है। एफडीए के पास केवल 50 विश्लेषक हैं। शासन स्तर पर तय किया गया है कि फिलहाल 15 विश्लेषक संविदा पर रखे जाएँ। इन पदों पर स्थायी नियुक्ति के लिए जरूरी कार्रवाई तेजी से की जाए। 

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  • Web Title:सभी ब्लड बैंकों की जाँच के आदेश