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2 अप्रैल, 2020|9:17|IST

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सऊदी में फंसे लोगों को लेकर प्रशासन में हड़कंप

सऊदी अरब में फंसे भारतीयों का खुलासा होने के बाद यहां प्रशासन में मंगलवार को पूरे दिन हड़कम्प मचा रहा। शासन ने भी डीएम और एसपी से ब्योरा तलब किया। स्थानीय खुफिया इकाई को सऊदी अरब में बंधकों जैसा जीवन जी रहे लोगों का ब्योरा जुटाने के लिए लगाया गया है। एलआईयू इंस्पेक्टर उमेश त्यागी का कहना है कि, वह मऊ जिले से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी एकत्र करके दो दिन के भीतर शासन को पूरी रिपोर्ट देंगे।
सऊदी अरब में नौकरी करने गए 45 लोगों को एक कारपेट कंपनी द्वारा बंधक बनाकर बगैर वेतन भत्ता दिये ही काम कराने और घर आने की इजाजत तक नहीं देने का मामला सुर्खियों में आने से मंगलवार को शासन ने पूरे मामले पर जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की।

पुलिस मुख्यालय और गृह सचिव के यहां से मांगी गयी रिपोर्ट में पूछा गया है कि, मऊ जिले के कौन-कौन लोग सऊदी अरब में फंसे हुए हैं। इनकी हकीकत क्या है। इनके परिजनों को भेजे गए पत्र और सरकार को क्या-क्या लिखा गया है। इसका भी विवरण मांगा गया है। प्रशासन ने स्थानीय खुफिया इकाई को लगाकर मंगलवार को जांच-पड़ताल शुरू कर दी। इस कवायद से पीड़ित परिजनों को अब सरकार से न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

इस बीच पूर्व पालिका अध्यक्ष अरशद जमाल ने बताया कि, सपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन की ओर से भारत सरकार के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री को पूरा मामला लिखा गया है। उनसे जेद्दा में बहलस नेशनल कारपेट फैक्ट्री में फंसे 45 भारतीयों को सम्मान के साथ रिहा करने की मांग की गयी है। कंपनी से श्रमिकों की सभी देनदारियां दिलाने का आग्रह किया गया है।

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