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एक नंबर की दो गाड़ी, आरटीओ का कारनामा

एक ही नंबर पर दो गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। ग्यारह वर्ष बाद जब वाहन के मालिक को इसका पता चला तो वह आरटीओ दफ्तर पहुंचा और एक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कैसिंल कराने की एप्लीकेशन दी। इस मामले पर क्या कार्रवाई की जाए, यह अधिकारियों को समझ नहीं आ रहा।

हापुड़ निवासी सुधीर ने ग्यारह वर्ष पहले टीवीएस मोटरसाईकिल खरीदी थी। आरटीओ में उसने रजिस्ट्रेशन कराया, उसे नंबर यूपी-14/एच/5644 मिला। वह आम लोगों की तरह गाड़ी चला रहा था। एक दिन उसे अपनी गाड़ी के नंबर का ट्रक दिखा तो पहले तो माजरा समझ नहीं आया। सुधीर ने उसके मालिक से गाड़ी के बारे में पता किया तो भी विश्वास नहीं हुआ। सुधीर ने कागजात देखे तो पता चला कि जिस दिन उसने मोटरसाईकिल खरीदी थी। उसी दिन ट्रक खरीदा गया था।

एक नंबर पर दो गाड़ी चलने की बात सुधीर ने वकील तजेंदर सिंह के माध्यम से एआरटीओ (प्र) के.पी.गुप्ता को बताई। जिस पर उन्होंने रिकार्ड चेक कराया तो पता चला कि एक ही नंबर दो वाहनों को अलॉट कर दिया गया था। एक कमर्शीयल और दूसरा प्राईवेट। इस मामले को सुलझाने के लिए एक वाहन का रजिस्ट्रेशन कैसिंल करना ही हल है।

गुप्ता ने बताया लेकिन इसमें एक पेंच भी है कि दोनों में से किसी गाड़ी पर मामला तो दर्ज नहीं है इसका पता लगाना पड़ेगा। एआरटीओ ने सुधीर के वकील तजेंदर सिंह से मोटरसाईकिल की रिपोर्ट निकलवाने को कहा है। उन्होंने एनसीआरबी (नेश्नल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो) और डीसीआरबी (डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो) की रिपोर्ट के बाद ही कोई कार्रवाई करने को कहा है।

 

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