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राहुल क्या,यहां तो सोनिया का लाइसेंस बन जाएगा

पृथक जनपद के रूप में अस्तित्व में आने के बाद आज भी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के बाशिंदों को बुनियादी सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है। जिस अवधारणा को लेकर पृथक जनपद की स्थापना की गई, वह दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। जिसके लिए हर रोज ग्रामीणों द्वारा चक्का जाम व धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। कभी सड़क की मांग तो कभी पानी के लिए लगातार मुख्यालय में ग्रामीणों द्वारा आंदोलन किया जा रहा है, किंतु इसके बाद भी ग्रामीणों को प्रशासन एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा महज आश्वासन ही मिल रहे हैं।

जनपद मुख्यालय से सटे होने के बावजूद भी कई गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों को मुख्य सड़क तक आने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ रहा है। जबकि मई-जून के साथ ही बरसात में भी पानी के संकट से गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों की दिनचर्या पानी जुटाने में ही कट रही है। बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों के पास राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने के सिवा कोई चारा नही है।

पिछले एक माह के भीतर दजर्नों बार रुद्रप्रयाग-गौरीकुण्ड एवं त्र्रषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया जा चुका है। जखोली ब्लॉक के घंघासू बांगर की जनता ने जहां छेनागाड़-घंघासू सड़क पर कार्य शुरू करने को लेकर राजमार्ग जाम किया, तो बच्छणस्यूं में बुनियादी सुविधाएं न होने से ग्रामीणों ने खांखरा में राजमार्ग जाम किया। अगस्त्यमुनि ब्लाक के तहत किमाणा दानकोट सड़क पर काम न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने गंगानगर में जाम किया।

जबकि तैला-सिलगढ़ पट्टी के ग्रामीणों ने क्षेत्र में पेयजल व सड़क सुविधा न होने से विभागीय अधिकारियों के घेराव की चेतावनी दी है। जिला मुख्यालय से सटे जवाड़ी, रौठिया, डुंग्ररी, तिलणी, ग्वाड थापली, भुनका, सेमी, ग्वफड़, पावौ, क्यार्की, रतूड़ा आदि ऐसे गांव है, जहां ग्रामीणों को न तो सड़क सुविधा का लाभ मिल पा रहा है और ना ही पानी की समुचित सुविधा है। लिहाजा ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर हो रहे हैं।

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