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अवाम की आवाज: दलबदलुओं को करं दरकिनार

लोकतंत्र के इस महापर्व में हर राजनीतिक दल में अफरा-तफरी मची है। बड़े-बड़े नेताओं तक को रातों-रात पार्टी बदलने में देर नहीं लग रही। कोई इधर.., कोई उधर..। इस भागमभाग में किसी पार्टी या नेता को आमजन की चिंता नहीं है। ..हर जुबान पर गुस्सा है ऐसे नेताओं के प्रति। अवाम की आवाज है, दलबदलू नेताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाए। ये सारी बातें रविवार को ‘हिन्दुस्तान’ की ‘बोलें आप’ मुहिम में सूबे की जनता ने कही।ड्ढr ड्ढr ‘बोलें आप’ में ‘हिन्दुस्तान’ को सैकड़ों जागरूक नागरिकों ने फोन कर दलबदलू नेताओं के प्रति अपनी प्रतिक्रिया दी।ीसदी लोगों की राय है कि दलबदल करने वाले नेता सिर्फ टिकट पाने के स्वार्थ और अपने हित के लिए पार्टी बदलते हैं। वहीं महज 2.48 प्रतिशत लोगों का ही यह मानना है कि नेता जनता और अपने समर्थकों के दबाव में पार्टी बदलते हैं, जबकि 1.65 फीसदी नागरिकों का कहना है कि नेता पार्टी के सिद्धांतों से असहमति की वजह से दूसर राजनीतिक दल में शामिल होते हैं। जनता की आवाज है, इन दलबदलू नेताओं के चुनाव लड़ने पर ही पाबंदी लगा दी जानी चाहिए। एएन कॉलेज के लेक्चरर डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह का तो कहना है, ‘चुनाव आयोग को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे दलबदलू नेताओं के नामांकन पत्र स्वत: ही रद्द हो जाएं।’ड्ढr पेशे से अधिवक्ता झंझारपुर के अरुण कुमार झा कहते हैं,‘जब ऐसे नेताओं को आमजनता और इस देश की चिंता नहीं है तो जनता को भी ऐसे नेताओं से सतर्क रहना चाहिए।’ कई का तो इसड्ढr राजनीति और राजनीतिज्ञों के पाला बदल से मोहभंग हो चुका है। बनमनखी, पूर्णिया के शिक्षक मो. इकबाल अंसारी का कहना है, ‘मैं तो कभी भी नेता बनना नहीं चाहूंगा।’ पर वहीं वे कहते हैं, ‘काश! राजनीति में कुछ अच्छे लोग आते।‘ चौकाने वाली बात तो यह है कि राजनीति दलों से जुड़े कार्यकर्ता भी मानते हैं कि आज नेताओं को सिर्फ अपनी चिंता है, अपने परिवार की चिंता है, उन्हें देश और जनता से कोई वास्ता नहीं है।

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