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जिन्ना की नहीं, भविष्य की बात करो

जिन्ना की नहीं, भविष्य की बात करो

एक तरफ जहां प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जिन्ना पर विचारों के लेकर उलझती जा रही है, वहीं युवाओं का मत है कि देश को भविष्य की तरफ प्रगतिशील कदम उठाने के प्रति ज्यादा गंभीर होना चाहिए। विभाजन और जिन्ना को लेकर यह विवाद व्यर्थ है।

उल्लेखनीय है कि जिन्ना पर लिखी किताब को लेकर वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया गया। युवाओं का मानना है कि जिन्ना, पटेल और विभाजन पर इस हद तक विवाद उचित नहीं है।

युवाओं ने कहा कि आज का भारत जिस चीज से सर्वाधिक परेशान है वह है बेरोजगारी, विकास और हमारी अर्थव्यवस्था की ताजा हालत। इसलिए हमें उसी पर अधिक गंभीर होना चाहिए।

हालांकि युवाओं का यह भी मानना है कि उपमहाद्वीप के बारे में पढ़ना और जानना सबको ही अच्छा लगता है, लेकिन उसको लेकर वर्तमान खराब करने का कोई मतलब नहीं है, उसे भूतकाल में ही छोड़ देना चाहिए।

विभाजन के समय पाकिस्तान के रावलपिंडी से चंडीगढ़ आए गौरांचल सेठी ने कहा कि विभाजन एक राक्षस के समान है, लेकिन उसको छोड़ना ही अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि मुझे याद नहीं है कि मेरे परिवार में आखिरी बार कब इस पर चर्चा हुई थी। पाकिस्तान में अभी भी सेठी परिवार की प्रॉपर्टी है। उन्होंने कहा कि विभाजन एक ऐसा दंश है कि वह हमेशा दुखी ही करेगा, जिसमें हजारों निर्दोषों की जानें गई थी। उन्होंने कहा कि वह वक्त अब बीत गया, उसे वहीं छोड़ दीजिए।

उन्होंने कहा कि हर कोई पैसे कमाना चाहता है और शायद जसवंत सिंह ने भी यही किया। भारतीय जनता पार्टी ने इस मु्द्दे पर जरूरत से अधिक प्रतिक्रिया व्यक्त की, जो कि नहीं होना चाहिए था।

दिल्ली की स्नेहा वशिष्ठ, जो अपनी एमबीए खत्म करने के बाद नौकरी की तलाश में है, ने कहा कि मुझे अचंभा होता है कि जिन्ना और विभाजन को लेकर इतना हो-हल्ला क्यों मचाया जा रहा है, वह इतिहास है और हमें उससे आगे बढ़ना चाहिए। 60 साल पहले घटी दुखदायी घटना को बार-बार याद करके क्या फायदा।

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में अंग्रेजी की शोध छात्रा साजिया सलाम का कहना है कि बार-बार विभाजन के मुद्दे को उठाना राजनीतिज्ञों के वैचारिक दिवालिएपन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को किसी मुद्दे को उछालना ही है तो कई राष्ट्रीय मुद्दे हैं जिससे जनता परेशान है। देश अभी सूखे की समस्या से जूझ रहा है भाजपा चाहे तो उस पर बहस छेड़कर सरकार को घेरने का प्रयास कर सकती है।

युवा संगठन के साथ काम करने वाली फखरा सिद्दीकी का मानना है कि इतिहास कभी भी अपनी महत्ता नहीं खोता, इसलिए हमें हमेशा उसको समझने और नए नजरिए से देखने का प्रयास करते रहना चाहिए। लेकिन गड़े मुर्दे उखाड़ने और घावों पर नमक छिड़कने की बजाय हमें ये प्रयास करना चाहिए कि कैसे घावों पर मरहम लगाया जाए।

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