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हिन्दी की पढ़ाई अनिवार्य करना चाहते हैं सिब्बल

हिन्दी की पढ़ाई अनिवार्य करना चाहते हैं सिब्बल

केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने देश के सभी स्कूलों में हिन्दी की पढ़ाई अनिवार्य करने की जोरदार वकालत की है। सिब्बल का कहना है कि इससे हिन्दी भाषी और गैर हिन्दी भाषी क्षेत्रों के छात्रों के बीच जुड़ाव मजबूत होगा। सिब्बल ने यह भी कहा है कि एक बार पूरे देश में हिन्दी का प्रचलन बढ़ जाए तो भारत को जनकारियों के लिए दूसरों की ओर ताकना नहीं पड़ेगा।

सेकेण्डरी एजूकेशन बोर्डो की परिषद की बैठक में सिब्बल ने सोमवार को हिन्दी का दायरा मातृभाषा से बढ़ाकर ‘ज्ञानोत्पादक’ और ‘सबको एक सूत्र में बाँधने वाली भाषा’ तक ले जाने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषा के साथ-साथ हिन्दी की पढ़ाई अनिवार्य करना इसलिए जरूरी है ताकि इसे ‘लिंगुआ फ्रैंका’ (दो अलग-अलग भाषाएँ बोलने वालों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली तीसरी भाषा) के तौर पर स्थापित किया जा सके। आज स्थिति यह है कि गैर हिन्दी भाषी और हिन्दी भाषी क्षेत्रों के छात्र एक-दूसरे से अंग्रेजी के जरिए जुड़ते हैं लेकिन यह काम हिन्दी का है। जब पूरा भारत हिन्दी के जरिए जुड़ेगा तब दूसरे देश भी हिन्दी के जरिए जुड़ने में दिलचस्पी दिखाएंगे।

सिब्बल ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा के साथ हिन्दी सीखने से छात्रों का मानसिक स्तर और जानकारी काफी उन्नत होगी। बकौल सिब्बल- ‘जब सब हिन्दी के जरिए जुड़ने लगेंगे तो भारत  दुनिया के सामने ज्ञान उत्पादक देश के रूप में सामने आएगा।’ इस बीच सीबीएसई के प्रमुख विनीत जोशी ने कहा है कि सीबीएसई स्कूलों में नई ग्रेडिंग व्यवस्था अगले सत्र से लागू करने की योजना है। इस में छात्रों को सिर्फ ग्रेड दिए जाएंगे और पास या फेल जैसा कुछ नहीं होगा।

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