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नरेगा के खाते सहकारी बैंकों से हटाने के आदेश जारी

राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूरे प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों में नरेगा के खाते खोलने पर रोक लगा दी है। इन बैंकों में अब नरेगा के नए खाते नहीं खोले जाएँगे। जिनके खाते पहले से जिला सहकारी बैंकों में चल रहे हैं उन्हें अपने खाते राष्ट्रीकृत बैंकों में ट्रांसफर करने होंगे। ग्राम्य विकास विभाग ने सोमवार को सभी जिलाधिकारियों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए।

हिन्दुस्तान ने सबसे पहले खबर छापी थी कि जिला सहकारी बैंक भ्रष्टाचार की एटीएम मशीन बन गए हैं। नरेगा घोटाले के कारण सीतापुर के एक जिला सहकारी बैंक के चपरासी तक के खाते में 14 लाख रुपए पाए गए। इस मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया।  नरेगा स्टेट काउंसिल की रविवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि नरेगा के सभी खाते जिला सहकारी बैंकों से हटाए जाएँ। इन बैंकों में नरेगा मजदूरों व कार्यदायी संस्था के खातों पर पाबंदी लगा दी गई है।

ग्राम्य विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने हिन्दुस्तान को बताया कि नरेगा की गाइड लाइन में केवल सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों में खाते खोलने का प्रावधान है। लेकिन मजदूरों की सुविधा देखते हुए कई जिला सहकारी बैंकों में नरेगा के खाते खोल दिए गए थे। इसमें कई अनियमितताएँ सामने आई हैं।

इसे देखते हुए स्टेट काउंसिल ने निर्णय लिया है कि नरेगा मजदूरों के खाते उन्हीं राष्ट्रीयकृत बैंकों में खाले जाएँ जहाँ ग्राम पंचायतों के खाते हैं। उन्होंने बताया कि इस बारे में सोमवार को आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यह जिम्मेदारी डीएम की होगी कि किसी जिला सहकारी बैंक में नरेगा का खाता न रहे।

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