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सरकार फोन काल्स पर रखेगी निगाह

सरकार फोन काल्स पर रखेगी निगाह

आतंकवाद के खतरे के मद्देनजर सरकार फोन काल्स की निगरानी के लिए एक केंद्रीयकत एजेंसी के गठन पर विचार कर रही है। इसके तहत लैंडलाइन और मोबाइल दोनों तरह की फोन काल्स पर सरकार निगरानी रख सकेगी। अभी तक फोन काल्स की निगरानी दूरसंचार आपरेटर द्वारा ही की जाती है।

दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास संगठन सेंटर फार डेवलपमेंट आफ टेलीमैटिक्स (सी-डाट) दूरसंचार सुरक्षा से जुड़ी एक परियोजना पर काम कर रहा है। इस परियोजना के तहत सरकार देश और देश के बाहर काल्स पर केंद्रीयकत व्यवस्था के तहत निगाह रख सकेगी। वर्तमान व्यवस्था में आपरेटर व्यक्तिगत तौर पर काल्स पर निगाह रखते हैं और प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मांगे जाने पर फोन टैप किया जाता है और काल्स की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

सी-डाट के कार्यकारी निदेशक पी वी आचार्य ने कहा कि इसे राष्ट्रीय परियोजना की तरह देखा जाना चाहिए। यह देश की सुरक्षा के लिए मुख्यत: कुछ संदेशों और बातचीत पर निगाह रखने की परियोजना होगी। आचार्य ने कहा कि हमारी टेक्नोलाजी किसी भी सेवा के आपरेटर को इंटरफेस मुहैया कराएगी, जिससे जरिये वे अपने नेटवर्क के संदेशों पर निगाह रख सकेंगे।

सरकार के पास संकेतों की खुफिया जांच एजेंसी है, जिसका संचालन सेना, नौसेना और वायुसेना द्वारा किया जाता है। यह एजेंसी अन्य देशों के सैन्य संदेशों (वायरलेस) पर निगाह रखती है। लेकिन अभी तक सरकार के पास मोबाइल, लैंडलाइन और इंटरनेट पर वायस काल्स की निगरानी का कोई केंद्रीयकत तंत्र नहीं है।

सरकार ने अभी तक यह फैसला नहीं किया है कि यह निगरानी व्यवस्था किस तरह काम करेगी। आचार्य ने कहा कि हम सिर्फ इसके लिए अवसर मुहैया कराएंगे पर यह कैसे होगा यह आपरेटरों और सरकार के बीच होने वाले करार पर निर्भर करता है। उन्होंने इस परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि पहले चरण में परियोजना पर 400 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह अगले साल पूरा जाएगा।

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