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खाने की दिनचर्या

तनाव के दौरान दिमाग ऐसे खाने की मांग करता है, जिसमें सेरोटोनिन की अधिकता हो। सामान्यत: यह ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनमें काबरेहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है। पर्याप्त मात्रा में सेरोटोनिन पहुंच जाने पर यह दिमाग को सिगनल देता है कि पेट भर चुका है।

खाने में चाकलेट, पेस्ट्री, पिज्जा, ब्रेड, बर्गर और आइसक्रीम होते हैं। ऐसा खाना खाने के दो घंटे बाद जब खून में शर्करा का स्तर, खाने के पहले वाली स्थिति में पहुंच जाता है, तो शरीर दिमाग को फिर से और खाने की इच्छा के सिग्नल भेजता है, जितनी ज्यादा शक्कर आप खाएंगे, उतनी ही भूख महसूस करेंगे।

शरीर उस शक्कर से ज्यादा से ज्यादा इंसुलिन की मात्रा का उपयोग ऊर्जा के लिए करेगा। जब शरीर ने ऊर्जा की जरूरत महसूस की, तो उसने इसे ग्लाइकोजन के रूप में एकत्र कर दिया और शेष को शरीर में वसा के रूप में स्टोर कर दिया। इसके कुछ उपाय इस प्रकार हैं।

- घर में मसालेदार स्नैक खाने से परहेज करें। ज्यादातर खाने के शौकीनों को पेस्ट्री, चॉकलेट और केक पसंद होते हैं। इसलिए घर में इन्हें न रखें। इसके बजाय भूख लगने पर दो-तीन चम्मच ग्लूकोज लें। यह मीठा भी होता है और शरीर में सेरोटोनिन स्तर को जल्दी बढ़ा देता है, जिससे दिमाग ज्यादा खाने की मांग नहीं करता।

- अगर आप अपना वजन कम करने की तैयारी कर रहे हैं, तो ध्यान रखिए कि इसे पाने के लिए आपको मेहनत की काफी जरूरत है।

- अपने भोजन के समय को व्यवस्थित रखें।

- सुबह नाश्ता नहीं, दोपहर में हल्का खाना और शाम को भारी डिनर, ऐसी डाइट से बचें।

- ध्यान रखिए कि मांस बढ़ाने के लिए व्यायाम बेहद महत्वपूर्ण है।

- अगर आप रोजाना व्यायाम करते हैं, तो कभी-कभार चॉकलेट, पेस्ट्री या तैलीय भोजन नुकसानदेह नहीं होता।

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