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जेल ब्रेक को आमादा हैं माओवादी

माओवादी जेल ब्रेक की पुनरावृति को आमादा हैं! बिहार की जेलों में बंद अपने हार्डकोर साथियों को मुक्त कराने के लिए रणनीति बनायी जा रही है। माओवादियों ने यह ऐलान कर दिया है कि ‘जहानाबाद एक झांकी है, केन्द्रीय जेल अभी बाकी है।’ बिहार में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में एनएसजी(नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड) तक को उतार चुकी सरकार के लिए यह बड़ी चुनौती है। बिहार में 6 सेंट्रल जेलें हैं और उनमें कई हार्डकोर माओवादी बंद हैं।

अजय कानू जिसे छुड़ाने के लिए जेल ब्रेक हुआ था से लेकर भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रमोद मिश्र तक बिहार की जेलों में बंद हैं। हाल के दिनों में एसटीएफ ने कई बड़े और इनामी नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। बिहार की अलग-अलग जेलों में करीब 1209 नक्सलियों और निजी सेनाओं के सदस्य बंद हैं। इनमें 93 नक्सली संगठन के जोनल और एरिया कमांडर शामिल हैं। इनमें मगध का जोनल कमांडर नागा पासवान ऊर्फ गदर जी ऊर्फ कृष्णा जी और सब जोनल कमांडर और 50 हजार का इनामी वीरेन्द्र कौशिक ऊर्फ मनीष जी जैसे बड़े नक्सली शामिल हैं।

यही लोग नक्सलियों के ऑपरेशन की रणनीति बनाते हैं जिनका जेलों में रहना माओवादियों को गवारा नहीं। सूत्रों के अनुसार इनकी रिहाई की योजना बनायी जा रही है। माओवादियों ने जहानाबाद की तर्ज पर ‘जिला ब्रेक कर जेल ब्रेक’ करने का ऐलान कर रखा है। सेंट्रल जेलों को ब्रेक करने की माओवादियों की चेतावनी को सरकार भी चुनौती मान रही है। खासकर माओवादियों के बंद को देखते हुए सभी जेलों में अलर्ट जारी किया गया है। हाईवे पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी गयी है। मकसद है माओवादी हमले की कोशिशों को नाकाम कर देना।

दूसरी ओर नक्सलियों को आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। गृह विभाग के अनुसार वर्ष 2005 से अभी तक 8932 राइफलें, 185 एलएमजी, 14 मोर्टार, 168 कार्बाइन, 946  पिस्टल, 572 ग्रनेड और 17,88,860 विभिन्न तरह की गोलियां और बमों की खरीद की गयी है। वहीं जेलों पर मंडराते खतरों को देखते हुए खासतौर पर जेलों के लिए 1030 राइफलें और 103000 गोलियां खरीदी गयी हैं।

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