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कोर बैंकिंग की राह पर नोएडा के डाकघर

डाक विभाग ने कोर बैंकिंग की शुरुआत करने के लिए कमर कस ली है। जिस तरह किसी भी बैंक से दूसरे बैंक के एकांउट का उपयोग किया जा सकता है, उसी तरह डाकघरों में भी कोर बैंकिंग की शुरुआत के बाद किसी भी स्थान के डाकघर से अन्य स्थान के डाकघर के एकाउंट को मैनेज किया जा सकेगा। डाक विभाग की ओर से सभी डाकघरों को आपस में जोड़ने और कोर बैंकिंग शुरू करने की कवायद जोर-शोर से चल रही है।

सेक्टर-19 मुख्य डाकघर कर्मी बी एस असवाल ने बताया कि डाकघरों में बैंकिंग पूरी तरह सफल है। अकेले नोएडा मुख्य डाकघर के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां लगभग सात से अधिक बचत योजनाएं चल रही हैं। इनमें एसवी, आरडी, एमआईएस, टीडी, पीपीएफ, एससीएस और एनएसएस शामिल हैं, जिनके लगभग 14,000 से अधिक खाताधारक हैं।

इनके अलावा केवीपी और एनएससी के धारकों की संख्या अलग है, जो लगभग पचास हजार से अधिक का आंकड़ा पार कर जाएगी। बैंकों के साथ चलने के लिए डाकघरों को हाइटेक होने की आवश्यकता है, जिसके लिए डाक विभाग ने भी प्रयास तेज कर दिए हैं।

डाक सेवा निदेशक राजेश कुमार ने बताया कि अभी कोर बैंकिंग में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन इसके लिए मुख्य डाकघर में प्रोसेस शुरू कर दिया गया है। सभी खाताधारकों के सिग्नेचर स्केनिंग व पासबुक प्रिंटिंग आदि चल रही है। उन्होंने बताया कि 2008 में शुरू हुए प्रोजेक्ट एरो के तहत अभी पहला फेज पूरा हुआ है, जिसमें देश के डाकघरों की कायापलट की जानी थी।

इसमें पहले भाग में 50, दूसरे में 450 और तीसरे भाग में 4500 डाकघरों को कम्प्यूटराईज्ड किया गया है। दूसरे फेज में अभी काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन इस सबमें कितना समय लगेगा ये बताना थोड़ा मुश्किल है। पर यह निश्चित है कि कोर बैंकिंग के बाद डाकविभाग अपने उपभोक्ताओं को बहुत बेहतर सर्विस दे सकेगा।

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