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खराब कोयले के चलते प्रतिदिन करीब 1000 मेगावाट बिजली का घाटा

 बिजली संकट से जूझ रहे उत्तर प्रदेश को केन्द्रीय प्रतिष्ठानों भारत कोल, नार्दन कोलफील्ड, सेन्ट्रल कोल्डफील्ड से प्राप्त हो रहे खराब कोयले की आपूर्ति के चलते प्रतिदिन लगभग 1000 मेगावाट बिजली का घाटा हो रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के निदेशक (तकनीकी) पी के अग्रवाल ने बताया कि खराब कोयले की आपूर्ति की लिखित शिकायत प्रतिष्ठानों को भेजी गई है।

इस संदर्भ में अधिकारियों के दल को केन्द्रीय प्रतिष्ठानों में भेजा गया है, जिससे बिजली संकट से जूझ रहे प्रदेश को खराब कोयले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। अग्रवाल ने बताया कि राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने सरकारी कंपनियों के द्वारा किए जा रहे कोयला आपूर्ति में पत्थर एवं कीचड़ की मात्र अधिक है, जिसके चलते बिजली उत्पादन में करीब 1000 मेगावाट का घाटा हो रहा है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पनकी, हरदुआगंज व पारीछा को सेन्ट्रल कोलफील्ड से कोयला प्राप्त होता है, जबकि ओबरा व अनपरा विद्युत संयंत्र को नार्दन कोलफील्ड से कोयला मिलता है। खराब कोयले के चलते प्रदेश में विद्युत उत्पादन में कमी आयी है जिससे कानपुर, रायबरेली व मथुरा जिलों के लिये बिजली की आपूर्ति में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। इसका प्रभाव मशीनों पर भी पड़ता है।

सूत्रों ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन पीकआवर में 9000 मेगावाट बिजली की खपत है जबकि प्रदेश सरकार 7700 मेगावाट ही बिजली की आपूर्ति कर पाती है।

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  • Web Title:खराब कोयले के कारण बिजली उत्पादन में घाटा