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कंडक्टरों को तहजीब सिखाए डीटीसी

मैं पालम गांव क्षेत्र में रहता हूं। गुड़गांव में एक प्रतिष्ठित रिटेल फर्म में कार्यरत हूं। मैंने 19-08-09 को धौला कुआं से गुड़गांव तक चलने वाली बस (नम्बर डीएल1पी-बी1051) ली और कंडक्टर महोदय को दस रुपए का नोट थमा ‘शंकर चौक’ तक का टिकट मांगा। डीटीसी के नियमानुसार यह 9 रुपए है। (दरअसल हरियाणा से चलने वाली बसों में दिल्ली, हरियाणा और टोल टैक्स के रूप में पैसे लिए जाते हैं)कंडक्टर ने मुजे 11 रुपए का टिकट थमा एक और रुपए की मांग की। मेरे यह बताने पर कि पालम मोड़ से शंकर चौक तक का किराया नौ रुपए ही है, कंडक्टर महोदय भड़क गए और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मुझे समझाने लगे कि मुझे बताना चाहिए था कि मैं कहां से बस में चढ़ा हूं। जब मैंने उनसे कहा उन्हें यह बात मुझसे टिकट बनाने से पूर्व पूछनी चाहिए थी, उन्होंने अभद्र एवं अशिष्टतापूर्ण शब्दों की झड़ी लगा दी। मेरा आप से नम्र निवेदन है कि ‘डीटीसी चालकों एवं कंडक्टरों के लिए लगने वाली तहजीब क्लास में उपरोक्त कंडक्टर को पहली पंक्ति का स्थान मिले।’
भास्कर भट्ट, पालम गांव, दिल्ली

विधि की पढ़ाई हिन्दी में हो
दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि विभाग में हिन्दी माध्यम से पढ़ रहे छात्रों के साथ बड़ा ही सौतेला व्यवहार किया जाता है। पुस्तकालय में विधि की नाममात्र ही किताबें नजर आती हैं, जिनसे विद्यार्थियों को वो किताबें बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। कक्षा में जो भी पढ़ाया जता, वह सब अंग्रेजी में ही पढ़ाया जता है चाहे किसी की समझ में आए या न आए। शिक्षकों को अपना कोर्स खत्म करने की जल्दी होती है। दोबारा पूछे जाने पर विद्यार्थी को हंसी का पात्र बनना पड़ता है। क्या हिन्दी में बात करना या परीक्षा देना जुर्म है?
निरंजन चौधरी, दिल्ली विश्वविद्यालय

खामोश क्यों?
17 अगस्त 2009 को देश की आजदी के महान सपूत, मदन लाल ढींगरा का 100वां बलिदान दिवस था। इस दिन मदन लाल ढींगरा आजादी की लड़ाई में ब्रिटिश शासकों से कड़ा संघर्ष करते हुए अपने देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए शहीद हो गए थे। उन्होंने ब्रिटिश शासकों द्वारा भारतीयों पर किए जा रहे जुल्मों का बदला एक अंग्रेज अफसर को गोली मार कर लिया। अफसोस इस बात का है कि शहीद मदन लाल ढींगरा के बलिदान दिवस पर न तो सरकार ने उन्हें याद कर समारोह करना उचित समझ और न ही सामाजिक, राजनैतिक संगठन इत्यादि ने।
देशबंधु, राजपुरी, उत्तम नगर, नई दिल्ली

महंगाई नापने की मशीन
माननीय वित्तमंत्री जब तक माइनस में पहुंच चुकी मुद्रास्फीति और कुलांचें मार रहे आठ प्रतिशत विकास दर को मेन्टेन करने में वक्त लगाएंगे, तब तक आम जनता नामक प्राणी का ‘स्वर्ग का टिकट’ कन्फर्म हो जाएगा। महंगाई मापने की सरकारी मशीन को शत-शत नमन।
निशिकान्त, दिल्ली

डॉन चढ़े हत्थे
पहले ही कहा था
मत मारो फट्टे
कहते फिरते थे
डॉन को तो कई..
चढ़ गए ना हत्थे।
वीरेन कल्याणी, शाहदरा, दिल्ली

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