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बोल्ट की चमक

उसैन बोल्ट बाईस साल के हैं और जानकार उनसे कई रिकॉर्ड तोड़ने-बनाने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अभी वे ऐसे खिलाड़ी बन चुके हैं जिन्होंने एथलेटिक्स और खेलों के बारे में कई अवधारणाओं को ध्वस्त कर दिया है। वे एथलेटिक्स के सुपरस्टार हैं और यह अनायास ही नहीं है। बोल्ट का महत्व कई मायनों में है। इन दिनों खेलों में वैज्ञानिक और तकनीकी तरक्की का बड़ा महत्व है और इसका अच्छा और बुरा असर देखने को मिलता है। खेल का सामान, खिलाड़ियों के वस्त्र, जूते से लेकर तो उनके खाने-पीने सबमें वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी और शोध का भरपूर इस्तेमाल होता है। लेकिन बोल्ट एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो सारी जानकारी और शोध को धता दिखाकर चैंपियन बने हैं। वे पूरी तरह से स्वाभाविक खिलाड़ी हैं या कि वे प्रकृति का वरदान हैं। इस मायने में वे तकनीक से बोझिल खेलों की दुनिया में मानवीय शरीर की स्वाभाविक सहज लय और शक्ति की जीत का झंडाफहराते हैं, बल्कि वे याद दिलाते हैं कि खेल की बुनियाद प्रयोगशलाओं के शोध में नहीं है, बल्कि मानव शरीर की गतिविधियों के उत्सव में है। छोटी दूरी के दौड़ के महान पूर्व चैंपियन माइकल जॉनसन इसीलिए बोल्ट की 200 मीटर की दौड़ का वर्णन करतेहुए हतप्रभ रह गए।

खास बात यह है कि इस स्वाभाविक प्रतिभा के बूते बोल्ट नए विश्व रिकार्डो की ओर धीमें-धीमें सरक नहीं रहे हैं, वे उन्हें अच्छे खासे अंतर से तोड़ रहे हैं। यह प्राकृतिक लय का उत्सव बोल्ट की दौड़ में सहज ही दिखता है। जहां विश्वचैंपियनशिप या ओलंपिक में सारे खिलाड़ी गंभीरता से एकाग्रचित होकर खेलते हैं, वहां बोल्ट दौड़ खत्म होने के पहले खुशियां भीमनाते दिखते हैं और दौड़ते हुए उनके चेहरे पर मुस्कान भी दिखाई देती है। वे हमें खेल के बुनियादी तत्व, खुशी की ओर ले जाते हैं जो आधुनिक खेलों के प्रतिस्पर्धी और व्यावसायिक माहौल से गायब हो रहा है। उसैन बोल्ट का महत्व और उनकी लोकप्रियता का राज यही है कि वे हमें फिर याद दिलाते हैं कि खेल में सबसे बुनियादी और सबसे बड़ा तत्व वह ऊर्जा है जो प्रकृति ने हमें दी है और खेल दरअसल प्रकृति की इस देन का उत्सव है।

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