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भारत को नहीं मिल सकेगी पर्याप्त मददः स्विस बैंक

भारत को नहीं मिल सकेगी पर्याप्त मददः स्विस बैंक

स्विट्जरलैंड के बैंक खातेदारों की जांच के बारे में अमेरिका से सहयोग करने को भले तैयार हो गए हों पर उन्होंने भारत से कहा है कि उनके पास खातों की जानकारी की उम्मीद से साथ आने का उसे (भारतीय अधिकारियों को) कोई फायदा नहीं होगा।

स्विट्जरलैंड के बैंकों ने यह बात अमेरिका के साथ यूबीएस के हुए समझोते के कुछ ही दिन बाद कही है जिसमें उसने अमेरिका को 4,450 ग्राहकों का ब्यौरा मुहैया कराने की बात है। बैंकों ने कहा है कि स्विट्जरलैंड का कानून और यहां तक कि कर चारी की जांच में सहयोग के संबंध में विकसित देशों के मंच (ओईसीडी) का आदर्श समझोता ऐसे खोजी अभियान की अनुमति नहीं देता जैसा कि भारत चाहता है। दूसरे शब्दों में इसका अर्थ है भारत इस उम्मीद में एक बैंक से दूसरे बैंक का रुख नहीं कर सकता कि इससे उसे कुछ काम की चीज हाथ लग जाएगी।

स्विस बैंकर्स एसोसिएशन के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इसका मतलब है कि भारत सीधे तौर पर अपनी डायरी स्विट्जरलैंड के सामने रख कर यह नहीं कह सकता कि क्या इन लोगों के बैंक खाते यहां हैं। स्विट्जरलैंड के बैंकों की गोपनीयता भारत के लिए हमेशा बड़ा मुद्दा रहा है। इस साल हुए आम चुनावों के दौरान यह भी बड़ा राजनैतिक मुद्दा बनकर उभरा था और सरकार ने हाल ही में कहा कि उसने कहा कि स्विट्जरलैंड में जमा भारतीयों के धन के बारे में वह वहां की सरकार से संपर्क कर रही है।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने हाल ही में संसद को बताया था कि सरकार देश से बाहर जाम काले धन को वापस देश में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुखर्जी ने कहा कि मुझे बताया गया है कि स्विट्जरलैंउ की सरकार ने इस मुद्दे पर बातचीत के लिए सहमति जता दी है। हमने यह मसला (काले धन का मुद्दा) न सिर्फ स्विट्जरलैंड की सरकार के साथ उठाया है बल्कि अन्य देशों के साथ भी उठाया है।

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