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कभी नहीं सोचा था यह मुकाम हासिल करूंगा: भूटिया

कभी नहीं सोचा था यह मुकाम हासिल करूंगा: भूटिया

बाईचुंग भूटिया ने कभी नहीं सोचा था कि वह इस मुकाम पर पहुंचेंगे लेकिन रविवार को नेहरू कप में किर्गीस्तान के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले में टीम की अगुवाई करते हुए वह 100 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले पहले भारतीय फुटबालर बन गए।

मैच शुरू होने से कुछ देर पहले अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ के महासचिव अल्बर्ट कोलासो और दिल्ली साकर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने भारतीय कप्तान भूटिया को इस उपलब्धि के लिए स्मारिका भेंट की। भूटिया ने सम्मान समारोह के बाद कहा कि मैं अपने देश के लिए 100 मैच खेलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। जब 1995 में मैंने थाईलैंड की तरफ से पहला मैच खेला था तो मैंने सोचा भी नहीं था कि मैं यह मुकाम हासिल करूंगा। मैंने एक बार में एक मैच के बारे में सोचा और इनमें से प्रत्येक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की।

सिक्किम के टिंकीटाम में जन्में भूटिया ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच 19 साल की उम्र में खेला था। वह 1995 में 12वें नेहरू कप में थाईलैंड के खिलाफ मैच में स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर उतरे थे और रविवार को उन्होंने इसी टूर्नामेंट में मैचों का शतक पूरा किया। भूटिया इस मैच को छोड़कर भारत के लिए अन्य सभी मैचों में शुरुआती एकादश में शामिल रहे।

वह 2002 में भारतीय टीम के कप्तान बने और उनकी अगुआई में देश ने छह खिताब 2002 में वियतनाम में एलजी कप, 2007 में नेहरू कप, 2008 में एएफसी चैलेंज कप और तीन सैफ कप जीते।

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