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सुखाड़ग्रस्त जिला घोषित कराने के लिए मांग रहे हैं मन्नत

खगड़िया जिले के लोग अजीब दुविधा में है। दो दजर्न से अधिक पंचायतें बाढ़ ग्रस्त हो गयी हैं। बाढ़ प्रभावित लगभग एक लाख की आबादी के साथ-साथ मक्का उत्पादक यही दुआ कर रहे हैं कि अल्ला मेध दे पर पानी न दे। जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराने की मुहिम चल रही है। प्रभारी मंत्री ने 10 अगस्त की सर्वदलीय बैठक में पन्द्रह दिनों तक इंतजार करने को कहा था।

यदि बारिश होती है तो किसानों का दावा कमजोर पड़ेगा। उधर कम वर्षापात के कारण धान की फसल मर रही है। सदर प्रखंड के अधिसंख्य किसानों ने मक्का और धान एक साथ लगा रखा है। मक्के की फसल तैयार हो चुकी है उसे पानी नुकसान पहुंचाएगा जबकि धान की बेहतर फसल के लिए पानी चाहिए। 

मानसी सैदपुर के बसंत सिंह कहते हैं कि केवाल मिट्टी और सीपेज के कारण मक्का नहीं हो पाता है जबकि ठाठा, बलहा, अमनी में धान ठीक-ठाक है। चौथम (कठमारा) के राजेन्द्र प्रसाद कहते हैं कि प्रखंड में बाढ़ और सुखाड़ दोनों है। माधवपुर (परबत्ता) के अनिल कुमार मिश्र कहते है कि इस समय पानी की आवश्यकता नहीं है। सुखाड़ के कारण मक्के की फसल बर्बाद हो गयी।  सरकार जिले को सुखाड़ग्रस्त घोषित करने में क्यों आनाकानी कर रही है।  सन्हौली के मिथिलेश सिंह कहते हैं कि इसबार धान का चांस कम है।

यदि सोनमनकी स्लुईस का एक फाटक खुल जाए तो शोक की नदी कोसी सैकड़ों किसानों के लिए जीवनदायिनी बन सकती है। जिला कृषि अधिकारी सुरेन्द्र नाथ कहते हैं कि जिले में वर्षापात तो कम हुआ है लेकिन डीजल अनुदान लेकर किसान पटवन कर सकते है लेकिन न जाने क्यों किसानों को अनुदान लेने में रुचि नहीं है। गत वर्ष का पौने सोलह लाख रुपये बचे रह गये। इस वर्ष जिले को 5 करोड़ रुपये मिले हैं लेकिन  इसे लेने वाले किसान ही नहीं मिल रहे हैं।

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  • Web Title:डीजल अनुदान लेने में किसानों की रूचि नहीं