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जनवितरण प्रणाली: नहीं मिल रहे बंटे कूपन के हिसाब

जन वितरण प्रणाली के उपभोक्ताओं के बीच बंटे कूपन का हिसाब नहीं मिल रहा है। जिलों में बीपीएल और अन्त्योदय योजना के उपभोक्ताओं के लिए अनाज व किरासन कूपन जबकि एपीएल उपभोक्ताओं के लिए किरासन कूपन भेजे गये।

कूपन बांटने वाले अफसरों को प्रतिदिन इसका ब्योरा उपलब्ध कराना था लेकिन खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के बार-बार मांगने पर भी उसे कूपन वितरण की जानकारी नहीं मिली। इससे खाद्यान्न और किरासन की कालाबाजारी रोकने का अभियान भी बाधित हो रहा है। जिलों के रवैये से खफा विभाग ने उन्हें रिपोर्ट भेजने के लिए सात दिनों की मोहलत दी है।  

राज्य में जून से ही नये कूपनों के आधार पर राशन और किरासन का वितरण किया जा रहा है। विभाग ने पहली बार 27 जुलाई को कूपन का ब्योरा मांगा। मकसद यह पता करना था कि कितने उपभोक्ता कूपन के दायरे से बाहर हैं लेकिन अफसरों ने इस पर ध्यान तक नहीं दिया। नतीजा विभाग में खोले गये मॉनिटरिंग सेल में तैनात कर्मी टेलीफोन पर कूपनों की सूचना जुटा रहे हैं।

हालांकि उन्हें भी आधी-अधूरी ही जानकारी मिल रही है। इसी वजह से विभागीय सचिव त्रिपुरारि शरण ने सभी डीएम को नाराजगी भरा पत्र लिखा है। हरेक जिले से बीपीएल और अन्त्योदय योजना के लाभार्थियों की संख्या, छापे और वितरित किये गये कूपन की संख्या का ब्योरा मांगा गया है। जिलों को यह भी बताना है कि कितने परिवारों को कूपन देना बाकी रह गया है।

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