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भाजपा संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित: जसवंत

भाजपा संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित: जसवंत

मोहम्मद अली जिन्ना को महान बताए जाने की अपनी बात पर अडिग जसवंत सिंह ने कहा है कि भाजपा से उनके निष्कासन की घटना से यह पता चल गया है कि पार्टी संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित है।

भाजपा से निष्कासित जसवंत ने कहा कि पार्टी ने जिन्ना: इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस किताब लिखे जाने के लिए उन्हें निष्कासित किए जाने से पहले मनुष्य के रूप में जिन्ना के वैयक्तिक योगदान और उनकी राजनीति के बीच में अंतर नहीं किया।

सीएनएन आईबीएन पर करन थापर के डेविल्स एडवोकेट कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मैंने यह नहीं सोचा था कि पार्टी इतनी ज्यादा संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित है। जिन्ना और पटेल के बारे में इतनी नर्वस है कि मैंने जो कुछ लिखा, उस पर कार्रवाई कर डाली। मेरी एक भावना है जिसे मैंने उठाया भी, शायद मेरे पूर्व सहकर्मियों ने जब मुझे सजा सुनाई तो उन्होंने वास्तव में किताब नहीं पढ़ी।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अपनी किताब में बल्लभ भाई पटेल की छवि धूमिल की है। जसवंत ने कहा कि मैंने सिर्फ इतिहास के तथ्यों का उल्लेख किया है। मैंने किसी प्रतीक की छवि धूमिल नहीं की। भाजपा के पूर्व नेता ने कहा कि यदि निष्कासन शब्द का इस्तेमाल न किया जाता और व्यक्तिगत तौर पर सूचित किया जाता तो उन्हें अच्छा लगता।

जसवंत ने कहा कि निष्कासन शब्द का इस्तेमाल न किया जाता। उनके पास वाक्यों के बेहतर विकल्प थे । जब किसी ने व्यक्तिगत रूप में आकर मुझे फैसले की जानकारी नहीं दी तो इससे मैं आहत हुआ। यहां तक कि आडवाणी ने भी मुझसे बात नहीं की। यह पूछे जाने पर कि क्या निष्कासन के बाद आडवाणी ने उनसे बात की, जसवंत ने कहा, नहीं। लेकिन अब इसका कोई मतलब नहीं है और अब बहुत देर भी हो गई है।

जसवंत ने कहा कि उन्हें निष्कासन की सूचना देने के बाद भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि वे मुद्दे पर फिर चर्चा करेंगे जो कभी नहीं हुआ। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा ने उनके निष्कासन का फैसला किताब पढ़ने के बाद किया, जसवंत ने कहा, नहीं । मैं ऐसा नहीं मानता, क्योंकि यह व्यावहारिक नहीं है। यदि आपने 700 पेज पढ़ लिए हैं तो यह तेजी से पढ़ने के कार्यक्रम का हिस्साभर हो सकता है। मैं नहीं मानता कि मेरा गद्य कोई कथा कहानी है। यह आसान नहीं है और इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने सितंबर 1947 में कबाइलियों के कश्मीर पर आक्रमण जिसके चलते पाकिस्तान से युद्ध हुआ, जैसी घटनाओं को जानबूझकर छोड़ दिया तो उन्होंने कहा कि मैंने इसकी ओर नहीं देखा, क्योंकि किताब बंटवारे से संबंधित है।

जसवंत ने कहा कि कबाइली पठानों का आक्रमण एक अलग विषय है। मैंने विस्तार से कलकत्ता में हुए नरसंहार की भी चर्चा की है। मैंने जिन्ना के सार्वजनिक जीवन की गलतियों की ओर नहीं देखा। उन्होंने कहा कि यदि वह जिन्ना के दूसरे पहलूओं के बारे में लिखते तो उन्हें एक अलग किताब लिखनी पड़ती। जसवंत ने कहा कि वैयक्तिक योगदान और सार्वजनकि आचरण के बीच अंतर किया जाना चाहिए। ये दोनों बहुत अलग-अलग चीजें हैं ।

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  • Web Title:भाजपा संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित: जसवंत