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संपत्ति की घोषणा को न्यायाधीश स्वतंत्र: बालकृष्णन

संपत्ति की घोषणा को न्यायाधीश स्वतंत्र: बालकृष्णन

न्यायाधीशों द्वारा अपनी संपत्ति की घोषणा किए जाने के खिलाफ होने की धारणा को खारिज करते हुए प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने रविवार को कहा कि उच्च न्यायपालिका के सदस्य ऐसा करने को स्वतंत्र हैं।

इसके साथ ही बालाकृष्णन ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डीवी शैलेंद्र कुमार को ‘पब्लिसिटी क्रेजी’ बताते हुए उनकी आलोचना की। बालाकृष्णन ने कहा कि न्यायपालिका का अध्यक्ष होने के कारण उन्हें सभी न्यायधीशों की ओर से बोलने का अधिकार है और यह अन्य देशों की न्याय प्रणाली में भी लागू है।

बालाकृष्णन ने कहा कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि न्यायपालिका में क्या हो रहा है और न्यायाधीशों द्वारा संपत्ति की घोषणा के बारे में मैंने जो कहा है, उस पर कायम हूं। उन्होंने कहा कि अगर न्यायाधीश अपनी संपत्ति घोषित करना चाहते हैं तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता। मैं उन्हें कैसे रोक सकता हूं। अगर कानून आ जाता है तो हरेक को घोषणा करनी होगी।

प्रधान न्यायाधीश बालाकृष्णन ने कहा कि न्यायमूर्ति कुमार पब्लिसिटी चाहते हैं और यही कारण है कि उन्होंने इस मुद्दे पर लिखा है। यह किसी न्यायाधीश के लिए अच्छा नहीं है। कुमार ने कहा था कि प्रधान न्यायाधीश को दूसरे न्यायाधीशों की ओर से बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि वह पब्लिसिटी चाहते हैं और किसी न्यायाधीश के लिए यह ठीक नहीं है। न्यायाधीशों को  ‘पब्लिसिटी क्रेजी’ नहीं होना चाहिए। बालकृष्णन ने कहा कि उन्होंने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा संपत्ति की घोषणा के बारे में बात की थी। संपत्ति की घोषणा संबंधी कानून के अभाव में न्यायाधीशों के बीच कोई समझौता नहीं है और इस संदर्भ में आमसहमति तैयार करना होगा। न्यायाधीशों की संपत्ति की घोषणा से संबंधित विधेयक के हाल ही में संसद में टल जाने और न्यायमूर्ति कुमार के आलेख की पृष्ठभूमि में प्रधान न्यायाधीश का विचार काफी महत्व रखता है।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 1997 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जेएस वर्मा द्वारा पारित संकल्प का अनुसरण कर रहे हैं और प्रधान न्यायाधीश के समक्ष अपनी संपत्ति की घोषणा कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय के सभी न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया है। उन्होंने कार्यभार संभालने के बाद की संपत्ति का भी ब्यौरा दिया है। लेकिन कुछ उच्च न्यायालयों ने संकल्प नहीं स्वीकार किया है और न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश को अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दे रहे हैं।

न्यायमूर्ति कुमार ने अपने आलेख में कहा है कि प्रधान न्यायाधीश को सभी उच्च अदालतों के न्यायाधीशों के बारे में बोलने का अधिकार नहीं है और उनके विचार संपत्ति की घोषणा के संबंध में सभी न्यायाधीशों के विचार नहीं हैं।

वरिष्ठ वकील और संविधान विशेषज्ञ केके वेणुगोपाल ने कहा कि मैं कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से सहमत हूं कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के सभी न्यायाधीशों को संपत्ति की पूरी घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

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