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सोया मिल्क अच्छा विकल्प

सोया मिल्क अच्छा विकल्प

दूध पियो, ताकतवर रहो! लेकिन धुर शाकाहारी इसे नहीं मानते। ये वे लोग हैं जो दूध को भी मांसाहार मानते हैं, इसीलिए उसे पीने का विरोध करते हैं। सोया मिल्क ऐसे लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है। इसमें दूध में मिलने वाले सभी पौष्टिक तत्व होते हैं।

जिस तरह कभी नूडल्स ने भारतीय बाजार में चुपचाप कदम धरा था, उसी तरह सोया मिल्क भी गुपचुप कनफेक्शनरी की दुकानों पर पहुंच चुका है। दोनों में समानता बस, इतनी सी है कि दोनों ही चीन से भारत पहुंचे हैं। नूडल्स ने खुले बाजार से लोकप्रियता पाई थी, सोया मिल्क डिब्बों में बंद होकर बाजार में पहुंचा है। धुर शाकाहारी इसे जनप्रिय बनाने का बीड़ा उठा चुके हैं। वे इसकी तमाम विशेषताएं बताते हैं और कहते हैं कि यह मानव शरीर के हित में है कि वह दूध की बजाय सोया मिल्क का सेवन करे। सांसद और पशु अधिकारों की समर्थक मेनका गांधी सोया मिल्क की बड़ी प्रशंसक हैं और ऐसे तमाम उत्पादों के बारे में बताती हैं जो सोया मिल्क से बनते हैं।

सोया मिल्क है क्या बला? यह और कुछ नहीं, सोयाबीन का दूध है। सोयाबीन्स को खूब सारे पानी में अच्छी तरह से पीसकर, उसे 15 से 20 मिनट उबालकर और फिर अच्छी तरह से छानने से सोया मिल्क तैयार हो जाता है। इसे सामान्य स्वाद के साथ पिया जा सकता है या कोई फ्लेवर मिलाकर। इससे पनीर बनाया जा सकता है, जिसे टोफू कहते हैं। इसका दही भी जमाया जा सकता है। सोया मिल्क दूध से इस लिहाज से फायदेमंद होता है कि इसमें प्रोटीन और आयरन ज्यादा होता है और फैट कम से कम। इसीलिए इसे कोलस्ट्रॉल फ्री कहा जाता है।

सोया मिल्क की शुरुआत चीन से हुई। बीफ यानी गोमांस के रसिकों को जब दूध की कमी सताने लगी, तब सोयाबीन से दूध तैयार करने का तरीका ईजाद किया गया। हालांकि इस बात के प्रमाण कम मिलते हैं। कुछ लोग इस बात का दावा भी करते हैं कि सोया मिल्क को उसके चिकित्सकीय गुणों की वजह से तैयार किया गया। जिन लोगों को लैक्टोस से एलर्जी होती है, जो कि दूध में मिलने वाली शर्करा है, उनके लिए सोया मिल्क फायदेमंद होता है।

वैसे चीन ही नहीं, एशिया के बहुत से देशों में सोया मिल्क का भरपूर इस्तेमाल होता है। न सिर्फ पीने के लिए बल्कि, उन सभी खाद्य पदार्थों में, जिनमें दूध का प्रयोग किया जाता है। जापान, कोरिया, मलयेशिया, सभी देशों में सोया मिल्क से बहुत से खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं। कोरिया में तो सोया मिल्क को सूप के तौर पर भी पिया जाता है, उसमें नूडल्स डालकर। सिर्फ एशिया ही नहीं, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में भी सोया मिल्क का खूब इस्तेमाल किया जाता है। ब्राजील में तो सोयाबीन के दूध के लिए धवल क्रांति कर दी गई है। इसके उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर जमीन छोड़ दी जाती है।

टेस्टी भी, हेल्दी भी
सोया मिल्क को टेस्टी बनाना बहुत आसान है। बाजार में वेनिला, स्ट्रॉबेरी फ्लेवर के सोया मिल्क उपलब्ध हैं। वैसे इसके स्वीट और सॉल्टी फ्लेवर का स्वाद, चीनी ब्रेकफास्ट का हिस्सा है। अगर कोई सोया मिल्क को मेनका गांधी की तरह घर में बनाना चाहे तो उसमें चीनी मिलाकर पी सकता है। नमकीन सोया मिल्क बनाने का तरीका चीनी पाक पुस्तकों से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए उसे प्याज, सरसों, हरी मिर्च और नमक से छौंका जा सकता है। चीन में इसका पनीर बनाते समय, लोग इसमें चिली सॉस, सोय सॉस और हल्का सा नमक मिला देते हैं।

पर स्वाद का क्या करें
दूध के स्वाद के शौकीनों को बेशक सोया मिल्क रास नहीं आएगा। चूंकि उसमें एक तरह की गंध होती है और स्वाद में हल्का कड़वापन भी। पर दूध कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। उसमें फैट भी होता है। ऐसे में क्या किया जाए? डायटीशियन ईशी खोसला कहती हैं, इसके लिए दूध को दो बार उबालकर, उसकी मलाई निकाल लीजिए। फिर उसमें एक तिहाई पानी मिलाइए और उबाल लीजिए। इससे दूध का फैट कम हो जाएगा।

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