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सात समंदर नापने निकला एक अकेला भारतीय

सात समंदर नापने निकला एक अकेला भारतीय

अकेले दम पर सात समंदर पार करने की अनूठी मुहिम पर निकले नौसेना के कमांडर दिलीप डोंडी को यकीन है कि वह 21000 नॉटिकल मील से अधिक के समुद्री सफर वाले इस अभियान में सफल रहेंगे और यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय बनेंगे।

इस एकल अभियान सागर परिक्रमा की परिकल्पना वीएडीएम (सेवानिवृत्त) एमपी अवाती ने तैयार की है और यह भारतीय नौसेना की परियोजना है, जबकि अभियान के लिए साढ़े छह करोड़ रुपये रक्षा मंत्रालय मुहैया करा रहा है।

कमांडर दिलीप नौ माह से अधिक की अपनी यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलिया के फ्रेमेंटल, न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च, फॉकलैंड आइलैंड के पोर्ट स्टेनली और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में रुकेंगे। इस तरह की यात्रा पर निकलने वाले पहले भारतीय कमांडर दिलीप ने रवानगी से पहले कहा कि इस प्रतिष्ठित परियोजना के लिए चुना जाना सम्मान की बात है। यह अभियान युवा भारतीयों के लिए उदाहरण होगा और उन्हें मुश्किल से मुश्किल चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करेगा। उम्मीद करता हूं कि मैं अपनी इस मुहिम में सफल रहूंगा।

उन्नीस अगस्त को स्वदेश में निर्मित महादेई नौका पर रवाना हुए नौसेना के क्लीयरेंस गोताखोर कमांडर दिलीप अगर इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम देते हैं तो हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले पहले भारतीय होंगे। इससे पहले दुनिया के 300 से अधिक व्यक्ति इस तरह के अभियान को अंजाम दे चुके हैं।

कमांडर दिलीप अपनी यात्रा के पहले पड़ाव में 40 दिन की यात्रा के बाद आस्ट्रेलिया के फ्रेमेंटल पहुंचेंगे और वहां पांच हफ्ते बिताने के बाद न्यूजीलैंड के एक माह के सफर पर रवाना होंगे जहां वह दो हफ्ते बिताएंगे। इसके बाद वह फॉकलैंड आइलैंड के दो माह के सफर पर निकलेंगे जहां दो हफ्ते रुकने के बाद एक महीने में केपटाउन और फिर वहां पांच हफ्ते बिताने के बाद मुंबई की लगभग दो माह की यात्रा पर निकलेंगे।

इस एकल अभियान के दौरान सुरक्षा आशंकाओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि इसके बारे में तो इस अभियान को अंजाम देने के दौरान ही पता चलेगा। वैसे यात्रा के दौरान मौसम, नौका को होने वाले नुकसान, र्दुाटना और तकनीकी समस्याओं जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता।

उन्होंने कहा कि हालांकि मैं अपनी नौका को काफी अच्छी तरह जानता हूं। देश में इतनी बड़ी और इतनी आधुनिक नौका पहली बार तैयार की गई है, इसलिए इसका काफी साजो सामान आयात किया गया है और मैं अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त हूं।

इतने लंबे सफर के दौरान भोजन और ईंधन के इंतजाम के बारे में उन्होंने बताया कि नौका पर तीन महीने के भोजन और 15,000 लीटर ईंधन की व्यवस्था है। इसके अलावा समुद्र के पानी को मीठे पानी में बदलने और हवा से बिजली बनाने की तकनीक भी नौका पर मौजूद है।

यात्रा के दौरान अपनी दिनचर्या के बारे में दिलीप ने बताया कि यह काफी हद तक मौसम पर निर्भर करेगा। अकेले यात्रा पर निकलने के कारण सारी जिम्मेदारियां मुझे खुद निभानी है। भोजन बनाना, नौका की मरम्मत, सफाई के अलावा मुझे नौसेना को रिपोर्ट करनी होगी और इसके अलावा मैं ब्लॉग भी लिख रहा हूं।

नौसेना के इस अधिकारी ने कहा कि उनकी सफल यात्रा की दुआ करते हुए लोगों ने उन्हें धार्मिक वस्तुएं भी दी हैं। उन्होंने कहा कि मेरे शुभचिंतकों ने मेरी सफलता और सलामती की दुआ करते हुए धार्मिक वस्तुएं और लकी चार्म दिये हैं जिन्हें मैंने संभालकर रखा है। उम्मीद करता हूं कि इससे मेरा अभियान सफलतापूर्वक पूरा होगा।

अतीत में इस तरह की यात्रा के अनुभव के बारे में पूछने पर दिलीप ने कहा कि मैं कभी अकेले इस तरह की यात्रा पर तो नहीं गया, लेकिन मुझे नौसेना के साथ 7000 मील से अधिक समुद्र में बिताने का अनुभव है जो इस यात्रा के दौरान काफी काम आएगा।

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