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हजारों को नेत्रदान के लिए राजी कर चुकी नन्हीं प्रकृति

उम्र के जिस पड़ाव पर बच्चे खिलौने और वीडियो गेम खेलते हैं। 10 साल की प्रकृति चंद्रा उस उम्र में नेत्रदान और उसकी अहमियत के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैला रही है।

लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सिटी मान्टेसरी स्कूल में कक्षा 6 की छात्रा प्रकृति अब तक 28 हजार लोगों से मृत्यु पश्चात नेत्रदान के लिए आवेदन भरवाने का अनोखा कारनामा कर चुकी है।

प्रकृति ने  में कहा कि लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करना हमारा सामाजिक कर्तव्य है और यह अभियान चलाने की जिम्मेदारी बड़ों के साथ-साथ बच्चे आसानी से उठा सकते हैं। प्रकृति कहती है कि अगर उत्तर प्रदेश में सभी स्कूलों के छात्र मेरा सहयोग करें तो मेरा छोटा-सा कदम सामाजिक क्रांति ला सकता है।
 
इस अनोखी मुहिम में प्रकृति के माता-पिता उसका उत्साहवर्धन करते हैं। प्रकृति के मुताबिक माता-पिता (दोनों फिजियोथेरेपिस्ट) के प्रयासों से ही मुझे नेत्रदान के लिए काम करने वाले सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों के बारे में जानकारी मिलती है। इसी आधार पर वह उनके साथ मुहिम चला रही है।

अपने इस अभियान में प्रकृति उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में 28 हजार लोगों को मृत्यु पश्चात नेत्रदान के लिए प्रेरित कर उनसे आवेदन भरवा चुकी है। 

इस मुहिम की तरफ प्रकृति के प्रेरित होने के पीछे एक कहानी है। प्रकृति के मुताबिक उसने यह निर्णय उस समय लिया, जब वह पांच साल पहले पिता के साथ एक दृष्टिबाधित स्कूल में गई थी। वहां उसका दोस्त शिवम पढ़ता था, जो देख नहीं सकता था।

वह कहती है कि शिवम को देखकर उसने अपने पापा से उसका इलाज कर ठीक करने को कहा तो पापा ने कहा कि शिवम तभी ठीक हो सकता है, जब कोई उसे नेत्रदान करे। तब से प्रकृति ने फैसला किया कि वह लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करना अपने जीवन का उद्देश्य बनाएगी।

इस मुहिम की शुरुआत प्रकृति ने घर के पास के एक पार्क से की थी। वहां उसने लोगों को नेत्रदान का महत्व बताकर मृत्यु पश्चात नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। पार्क से शुरू हुआ उसका अभियान धीरे-धीरे बड़ा रूप लेते हुए राज्यस्तरीय हो गया। अब उसकी बात हजारों लोगों तक पहुंचने लगी है।

प्रकृति के मुताबिक वह लोगों को बताती है कि मृत्यु के बाद हमारा शरीर (आंखें) बेकार हो जाता है। ऐसे में हमारे दुनिया से जाने के बाद अगर हमारी आंखों से किसी की अंधेरी दुनिया में उजाला फैल जाए तो यह बहुत बड़ा पुण्य का काम होगा।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी.एल.जोशी ने हाल ही में प्रकृति को राजभवन बुलाकर इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा कारनामा करने के लिए बधाई देते हुए उसके अभियान की सराहना की।

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