DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भाजपा में संकट, थिंक टैंक कुलकर्णी का इस्तीफा

भाजपा में संकट, थिंक टैंक कुलकर्णी का इस्तीफा

भाजपा में आंतरिक मतभेदों और जसवंत सिंह के निष्कासन से पैदा विवादों के बीच अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के करीबी सहयोगी सुधीन्द्र कुलकर्णी ने भी  इस्तीफा दे दिया है जिससे पार्टी को और शर्मिन्दगी का सामना करना पड़ा है।

पूर्व में आडवाणी का भाषण तैयार करने वाले 52 वर्षीय कुलकर्णी ने कहा कि वह पार्टी के साथ अपने सक्रिय संबंधों को समाप्त कर रहे हैं, क्योंकि वह अपने विचार को व्यक्त करने की स्वतंत्रता चाहते हैं। बहरहाल, कुलकर्णी ने जोर देकर कहा कि उनके इस्तीफा देने के निर्णय का जसवंत सिंह के निष्कासन से कोई लेना-देना नहीं हैं।

कुलकर्णी ने कहा कि भाजपा के 13 वर्षों तक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने के बाद मैंने पार्टी से अपने सक्रिय सहयोग को समाप्त करने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा  कि बहरहाल, मैं पार्टी का शुभचितंक बना रहूंगा।


पार्टी से इस्तीफा देने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर पूर्व पत्रकार तथा कभी भाकपा के कैडर रहे कुलकर्णी ने कहा कि मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि मैं पार्टी के लिए कोई ठोस सहयोग नहीं कर सकता हूं क्योंकि आज जिस रुख पर पार्टी है उससे मेरा वैचारिक मतभेद है।

उन्होंने कहा कि मैं अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता चाहता हूं और अपने विश्वास के प्रति ईमानदार हूं। इसी प्रकार मैं पार्टी में अनुशासन का भी सम्मान करता हूं, इसलिए मैं पार्टी छोड़ रहा हूं । बहरहाल, भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कुलकर्णी के पार्टी या किसी नेता को छोड़ने से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कुलकर्णी भाजपा के नेता नहीं है और न ही पार्टी के कोई पदाधिकारी ही हैं।

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद कुलकर्णी ने पार्टी के चुनाव अभियान, रणनीति एवं प्रबंधन की आलोचना की थी। इसके अलावा उन्होंने वरूण गांधी के घृणा फैलाने वाले भाषण की भी आलोचना की थी। कुलकर्णी ने भाजपा के कामकाज में संघ परिवार की दखलंदाजी के बारे में भी लिखा था।

एक समाचार पत्र में अपने लेख में कुलकर्णी ने जसवंत सिंह को पार्टी से निकाले जाने के तौर तरीके की काफी आलोचना की थी। जसवंत सिंह को शिमला में भाजपा की चिंतन बैठक शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही पार्टी से निकाले जाने की घोषणा की गई थी।


जब उनसे पूछा गया कि जिस तरह से सिंह को हटाया गया क्या यही उनके इस्तीफा देने का कारण तो नहीं, कुलकर्णी ने कहा कि मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरे निर्णय का निष्कासन से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने इस आशय का निर्णय कई सप्ताह पहले ही ले लिया था और आडवाणी जी को इसके बारे में बता दिया था।

उन्होंने कहा कि जब आडवाणी जी को मेरे इस निर्णय की जानकारी मिली तो वह काफी दुखी हुए। कुलकर्णी ने कहा कि मेरा आडवाणी जी और वाजपेयी जी के प्रति सम्मान अभी भी जारी है। भविष्य की योजना के बारे में पूछे जाने पर कुलकर्णी ने कहा मैं सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहूंगा और सभी राजनीतिक दलों में समान विचारधारा वाले लोगों के साथ मिलकर काम करूंगा ताकि बेहतर शासन को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दों पर आम सहमति कायम करने में अपना योगदान दे सकूं। कुलकर्णी के पार्टी से इस्तीफा देने के निर्णय पर भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि वर्ष 2005 के बाद से कुलकर्णी भाजपा के सदस्य नहीं हैं।

उन्होंने कहा  कुलकर्णी चुनाव से संबंधित कार्यो से जुड़े थे। लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने सम्पूर्ण चुनाव तंत्र को भंग कर दिया था। भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता बलवीर पुंज ने कुलकर्णी को मूल्यवान सहयोगी करार दिया लेकिन कहा कि अगर कुलकर्णी भाजपा में असहज महसूस करते हैं तो उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय किया है और यह उनका निर्णय है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:भाजपा में संकट, थिंक टैंक कुलकर्णी का इस्तीफा